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मैनपुरी में मुलायम की भतीजी सपा के गढ़ में नहीं खिला सकी कमल

मैनपुरी में मुलायम की भतीजी सपा के गढ़ में नहीं खिला सकी कमल
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मैनपुरी में भाजपा के भितरघातियों की वजह से हारी चुनाव

(सुघर सिंह सैफई)

मैनपुरी । समाजवादी पार्टी के संरक्षक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव उर्फ वेवी समाजवादी पार्टी के गढ़ में भाजपा का कमल नहीं खिला सकी। सैफई परिवार की बेटी की हार से समाजवादी पार्टी में जश्न का माहौल है वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता मायूस हैं संध्या को सपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार ने 190 7 वोटों से करारी शिकस्त दी है। मैनपुरी को सपा का गढ़ माना जाता है और खुद मुलायम सिंह यहां से सांसद हैं। 4 में से 3 विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है यहां करहल से सोबरन सिंह यादव, किशनी से बृजेश कठेरिया, मैनपुरी सदर से राजकुमार यादव राजू, विधायक हैं जब कि भोगांव से भारतीय जनता पार्टी के रामनरेश अग्निहोत्री विधायक हैं। मैंनपुरी में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर वर्ष 1991 से समाजवादी पार्टी का कब्जा है सत्ता में काबिज होने के बाद भाजपा अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करना चाह रही थी इसलिए सपा से बगावत करने वाली मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव उर्फ वेवी को भाजपा से टिकट दिया था लेकिन संध्या जीत दर्ज नहीं कर सकी।

प्रमोद कुमार को 7905 वोट मिले हैं, जबकि संध्या यादव को 5998 वोट मिले है। इस सीट पर कुल सात प्रत्याशी मैदान में थे।

संध्या यादव सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव की भतीजी हैं। वह सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। पंचायत चुनाव से पहले सैफई परिवार से बगावत कर भाजपा में शामिल हुई थीं। संध्या यादव ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर मैनपुरी जिला पंचायत के वार्ड 18 से चुनाव लड़ा था। सपा ने प्रमोद कुमार को उनके सामने मैदान में उतारा था।

संध्या यादव इससे पहले 14 जनवरी 2015 को समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के तौर पर मैनपुरी जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गईं थीं। सात जुलाई 2015 को सदर सीट से सपा विधायक राजकुमार उर्फ राजू की अगुवाई में एक धड़ा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था, लेकिन उस वक्त संध्या को भाजपा का सहयोग मिल गया था और उनके खिलाफ प्रस्ताव गिर गया था। उसके बाद से संध्या और उनके पति भाजपा में शामिल हो गए थे।

वहीं जानकार सूत्र बताते हैं कि मैनपुरी में भारतीय जनता पार्टी के नेता भी संध्या यादव को हराने के लिए षड्यंत्र करते रहे। और इन्ही भितरघातियो की बजह से संध्या यादव चुनाव हार गई।

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