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हड्डी में दर्द बोन ट्यूमर का लक्षण

हड्डी में दर्द बोन ट्यूमर का लक्षण
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टीएमयू में बोन ट्यूमर - हाउ टू टेक बोन बॉयोप्सी पर वर्कशॉप

खास बातें

दर्द को नजरअंदाज न करें तुरंत ले डॉक्टर की सलाह : डॉ. विवेक

वर्कशॉप में हुए तीन इंटरैक्टिव सत्र, पीजी के स्टुडेंट्स भी हुए शामिल

हड्डी की जांच और उपचार की आधुनिक तकनीकों को भी सिखाया

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑर्थोपेडिक्स में बोन ट्यूमर - हाउ टू टेक बोन बॉयोप्सी पर आयोजित वर्कशॉप में मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर-मस्कुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी यूनिट, दिल्ली के हेड डॉ. विवेक वर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि बोन ट्यूमर पर प्रकाश डालते हुए बताया, यदि हड्डी वाली जगहों- हाथ, पैर, जांघ, छाती में सूजन या दर्द है तो यह बोन ट्यूमर का लक्षण भी हो सकता है। इसे नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। बोन ट्यूमर के शुरुआती लक्षणों में हड्डी में दर्द होने, वजन कम होना आदि शामिल हैं। बोन ट्यूमर का एक्स-रे, एमआरआई और बोन बॉयोप्सी के जरिए पता लगाया जा सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को एक्स-रे की जांच के आधुनिक तरीकों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. वर्मा ने बताया, मरीज की शुरुआती जांच ठीक से करें, साथ ही मरीज की हर समस्या को ध्यान से सुनें।

बोन ट्यूमर पर तीन इंटरैक्टिव सत्र हुए। पहले सत्र में कैसे एक पैथोलॉजिकल घाव का सामना करना पड़ता है, ऑर्थोपेडिक सर्जरी में प्रोटोकॉल को समझना, एक्सरे को कैसे पढ़ना है, कब और कहां रेडियोलॉजिकल जांच की जानी है, पर चर्चा हुई। दूसरा सत्र ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी अपडेट पर था। इसमें रूटीन ऑर्थोपेडिक्स प्रक्रिया और ऑन्कोलॉजिकल प्रक्रिया में दृष्टिकोण के अंतर, घातक अस्थि ट्यूमर में प्रबंधन के सिद्धांतों और लिम्ब साल्वेज सर्जरी में हाल के अपडेट जैसे विषयों पर गहनता से प्रकाश डाला गया। विभिन्न शब्दावली जैसे ट्यूमर, सरकोमा, स्किप लीज़न, मेटास्टेसिस, नियो-एड्जूवेंट, आदि पर चर्चा की गई। हमें हिस्टोलॉजी संचालित दृष्टिकोण और सर्जिकल दृष्टिकोण के सिद्धांतों के बारे में भी बताया गया। ट्यूमर प्रोस्थेसिस, इंटरकेलरी रेज़न, लेज़र के लिए लिक्विड नाइट्रोजन, रोटेशनप्लास्टी का उपयोग भी सिखाया गया।

डॉ. वर्मा बोले, बोन ट्यूमर को ऑपरेशन के जरिए ख़राब हड्डी को निकालकर वहां ग्राफ्ट लगाया जाता है। वर्कशॉप में हड्डी की जांच और उपचार की आधुनिक तकनीकों को भी सिखाया गया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अजय पंत कहा, इस तरह के सत्र को नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए ताकि ऑर्थोपेडिक्स में स्नातकोत्तर छात्रों को लाभ हो और यह भी संकाय सदस्यों को अपने ज्ञान को रिफ्रेश करने में मदद करेगा। डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑर्थोपेडिक्स के विभागाध्यक्ष प्रो. अमित सराफ ने आश्वासन दिया कि विभाग भविष्य में भी इस तरह के सत्र के आयोजन के अपने प्रयासों को जारी रखेगा। सत्र का समापन अतिथि संकाय डॉ. विवेक वर्मा और उनकी टीम के धन्यवाद के साथ हुआ। वर्कशॉप में डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. मनमोहन शर्मा, डॉ. प्रखर अग्रवाल, डॉ. मीर शाहिद उल इस्लाम, डॉ. हितेंद्र कुमार भारतीय, डॉ. अल्ताफ हुसैन, डॉ. शुजा नाजिम के अलावा पीजी के छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे।

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