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फर्जी ग्राहक बन कर पुलिस ने चार महिलाओं को किया गिरफ्तार, एक नवजात बालक को छह लाख में बेच रहीं थी

फर्जी ग्राहक बन कर पुलिस ने चार महिलाओं को किया गिरफ्तार, एक नवजात बालक को छह लाख में बेच रहीं थी
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ओमप्रकाश यादव।

अहमदाबाद गुजरात। नड़ियाद पुलिस ने माता सहित चार ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार किया है जो नवजात शिशुओं को खरीदे - बेचने का धंधा करती थीं। अब तक इस गिरोह महिलाएं चार बालकों को बेच चुकी है। वर्ष 2015 से सरगोसी सेन्टर पर कार्य कर चुकी उक्त तीनों महिलाओं ने अस्पताल से ही निघ संतान दंपतियों का एड्रेस लेकर उनके साथ अवैध रुप से बालकों का क्रय - बिक्रय कर रहीं थी। अन्य राज्य से गरीब गर्भवती महिलाओं को डिलिवरी से एक महीने पहले बहला फुसला कर नड़ियाद लाती थी और सही सलामत डिलिवरी करा कर नवजात शिशुओं को बेच देती थी।

नड़ियाद एसओजी पुलिस के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि नड़ियाद में वर्षों से बालकों को खरीदने बेचने का धंधा चल रहा है। पुलिस ने डमी ग्राहक तैयार कर समग्र मामले का पर्दाफ़ाश किया है। इस मामले की मुख्य सूत्रधार माया जो मूल रुप से महाराष्ट्र की रहने वाली है लेकिन वर्तमान समय में पीजी रोड कर्मवीर सोसायटी में रहती है। यह राज्य के बाहर से अति गरीब महिलाओं को नड़ियाद लाने का काम करती थी। डिलिवरी के बाद नवजात शिशु को महिला एजेन्टों के माध्यम से बेचवाने का कार्य करती थी। महिला पीएसआई आर डी चौधरी ने निः संतान दंपती बन कर उक्त महिलाओं से सम्पर्क किया था। छह लाख रुपये में बालक देने की बात हुई थी। जब एक महिला छह दिन के बालक को लेकर संतराम मंदिर के पास आई तो पुलिस ने पूरे इलाके को कोर्डन कर के अन्य तीन महिलाओं को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अन्य महिलाओं में वाणिया वाड निवासी मोनिका शाह, रामादूधा की चाली निवासी पुष्पा पटेलिया तथा बालक बेचने वाली राधिका गेडम है जो मूल रुप से महाराष्ट्र की रहने वाली है, एक महीने से कम्फर्ड होटल के रुम नम्बर 203 में रह रही थी। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नड़ियाद की यह तीनों महिलाएं अस्पताल के सरोगसी सेन्ट में काम कर चुकी हैं। वहीं से नि: संतान दंपतियों का एड्रेस लेकर अपना गैर कानूनी व्यवसाय चालू किया था। अपने पुत्र का विवाह कराने के लिए मोनिका शाह दूसरे को बालकों को बेचने का कारोबार कर रही थी।

पुलिस का अनुमान है कि यह गिरोह वर्ष 2015 से सक्रिय है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने भारत में कामर्सियल सरोगसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरोगसी सेन्टर बंद होने पर उक्त महिलाओं ने अपना व्यापार शुरु किया था।पूरे कौभांड की मुख्य सूत्रधार माया दाबला बिक्री प्रक्रिया के सभी खर्च के उपरान्त प्रत्येक बालक के बिक्री पर 2.50 लाख रुपये कमीशन लेती थी। मेनिका शाह को दो लाख रुपये तथा पुष्पा पटेलिया को 1.25 लाख रुपये मिलता था। बालक बेचने वाली माता राधिका गेडाम को डेढ महीना पहले नड़ियाद लाया गया था। जिसे माया अपने घर रखी थी। छह दिन पहले राधिका ने एक बालक को जन्म दिया था, जिसे बेचने के लिए लाया गया था। राधिका ने पुलिस को बताया कि आर्थिक संकट के कारण वह माया के कहने पर वह 1.50 लाख रुपये में अपने बच्चे को बेचने के लिए तैयार हुई थी।

एसओजी पीएसआई ने कहा कि इस गिरोह का पर्दाफ़ाश करने के लिए महिला पीएसआई चौधरी डमी ग्राहक बन कर उक्त गिरोह की सदस्यों से सम्पर्क किया था। तीनों महिलाओं ने मिलकर छह लाख रुपये में बालक देने का सौदा किया था। पैसे देने के पहले बालक दिखाने की बात पर जब महिला बालक लेकर आई तभी पुलिस ने कोर्डन करके तीनों को गिरफ्तार कर लिया।इस मामले की इन्चार्ज एस पी अर्पिता पटेल के अनुसार एक महिला सरोगसी के द्वारा तीन बालक और दूसरी एक बालक सहित कुल चार बालकों को गोवा, जयपुर, और रायपुर में बेचा गया है। यह महिलाएं नवजात बालक, दो वर्ष के बालक और छह वर्ष के बालक तक की बिक्री करती थीं। यह गिरोह ग्राहक की आर्थिक स्थिति और जरुरत को ध्यान में रख कर भाव निर्धारित करता था। पुलिस इस मामले से जुड़ी सभी पहलुओं की गंभीरता पूर्वक जाँच कर रही है।

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