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एक और विभाजन की कगार पर है पाकिस्तान, पठानों का पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट इतना ज्यादा तेज हो गया है कि पाकिस्तान की सेना इससे घबरा गई है

एक और विभाजन की कगार पर है पाकिस्तान, पठानों का पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट इतना ज्यादा तेज हो गया है कि पाकिस्तान की सेना इससे घबरा गई है

पाकिस्तान को आशंका है कि पख्तून पाकिस्तान को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं. पाकिस्तानी सेना पख्तूनों को धमकाने में बेशक लगी है, लेकिन पठानों का आंदोलन इतना तेज हो गया है कि वहां की सरकार और सेना दोनों के पसीने छूटने लगे हैं. पठान अब अपने लिए नए देश की भी मांग कर रहे हैं. हालांकि ये मांग बहुत पुरानी है. पठान हमेशा से कहते रहे हैं कि उन्हें अपने लिए अलग देश चाहिए. आजादी के समय भी उन्होंने अपने लिये नए देश की मांग की थी.

पाकिस्तान की ताकतवर सेना को पठानों का संगठन पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट इस दमदार तरीके से चुनौती दे रहा है कि विदेशी मीडिया में ये सवाल उछलने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान टूटने वाला है. पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान के उकसावे पर पठान पाकिस्तान को अस्थिर करने में लगे हैं.

दरअसल पाकिस्तान में ये नया आंदोलन इतना जबरदस्त है कि उसे दबाना वाकई पाकिस्तानी सेना के लिए मुश्किल हो रहा है.

बड़े पैमाने पर मिल रहा है लोगों का समर्थन

पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में इस आंदोलन को बड़े पैमाने पर लोगों का समर्थन भी मिल रहा है. पिछले दो सालों से पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) को खासा समर्थन मिला है. उसकी रैलियों में दसियों हजार लोग जमा होते हैं. पाकिस्तान की इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि वो उन्हें दबाने में लगा हुआ है.

पाकिस्तानी सेना ये आरोप भी लगा रही है कि जिस तरह ये आंदोलन मजबूत हो रहा है उससे लगता है कि इसे भारत और अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसियों से पैसा मिल रहा है.

पाकिस्तान सेना के खिलाफ

वहीं पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट यानि पीटीएम कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी युद्ध के नाम पर लगातार पख्तूनों का अपहरण और उनकी हत्याएं करने में लगा. जिस तरह बड़े पैमाने पर लोग इस आंदोलन के समर्थन में आ रहे हैं, उससे लगता है कि वो पाकिस्तानी सेना के सताए हुए हैं. और अब इस जुल्म के खिलाफ खड़े हो रहे हैं.

1947 में पाकिस्तान बनने के बाद से ही पख्तून देश के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहे हैं. पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पख्तून आबादी रहती है.

पाकिस्तान शुरू से ही पख्तून बहुल एक अलग देश के विचार को खारिज करता रहा है. कुछ विश्लेषक कहते हैं कि पाकिस्तानी अधिकारी इलाके में इस्लामीकरण के जरिए "पख्तूनिस्तान" के आंदोलन को दबाना चाहते हैं. इस आंदोलन का नेतृत्व उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष राजनेता और कार्यकर्ता कर रहे हैं.

इस आंदोलन के नेता के रूप में मंज़ूर पश्तीन नाम का एक युवा पश्तून नेता लगातार सुर्खियों में है. ये वो इलाका भी है, जहां तालिबान की पकड़ मजबूत है.

24 साल के मंज़ूर पश्तीन पाकिस्तान के युद्ध ग्रस्त इलाके दक्षिणी वज़ीरिस्तान से ताल्लुक रखते हैं. यह इलाका पाकिस्तानी तालिबान की मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता रहा है.

इस इलाके के लोग पख़्तूनिस्तान या पठानिस्तान के नाम से नया देश बनाना चाहते हैं. पख़्तूनिस्तान का अधिक हिस्सा अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की जमीन पर लेकिन भारत और ईरान का भी छोटा सा हिस्सा इसमें शामिल है.

पख़्तूनिस्तान शब्द का उपयोग अंग्रेज़ों ने पहली बार किया था, जब वह भारत पर शासन कर रहे थे, ब्रिटिश राज के लोग पश्चिमी-उत्तरी क्षेत्रों को पख़्तूनिस्तान कहा करते थे.

वैसे ये पाकिस्तान का वो इलाका भी है, जहां जमकर बंदूक और पिस्तौलें तैयार की जाती हैं. खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत के शहर दर्रा आदम खेल को दुनिया का सबसे बड़ा गैरकानूनी बंदूक बाजार भी कहा जाता है.

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