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न्यायपालिका और विधायिका का अनावश्यक हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए घातक: साझा संस्कृति मंच

न्यायपालिका और विधायिका का अनावश्यक हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए घातक: साझा संस्कृति मंच


वाराणसी में सामाजिक सरोकारों से जुडी सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त संगठन साझा संस्कृति मंच ने बयान जारी कर कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के आनन फानन किया गया तबादला न्यायपालिका पर विधायिका का अनावश्यक हस्तक्षेप है जो निश्चित रूप से सत्ता दल से जुड़े कुछ बड़े नेताओ को बचाने के लिए किया गया है. करोड़ो भारतीयों को देश की न्यायप्रिय और ईमानदार न्यायपालिका में अटूट विश्वास है, न्याय की स्वस्थ प्रक्रिया को दबाव बना कर विफल करने की कोशिश निश्चित रूप से लोकतंत्र को कमजोर करेगी.

ज्ञातव्य है कि दिल्ली में हुयी हिंसा में घायलों को समुचित इलाज और सुरक्षा मुहैया कराने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करने और कुछ नेताओं के खिलाफ दंगा भड़काने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते समय दिल्ली उच्च न्यायालय के जज जस्टिस एस. मुरलीधर ने दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की थी. उसके तुरंत बाद उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया है, जबकि उक्त मामले की पुनः सुनवाई गुरुवार को होनी थी.

रिपोर्ट:-राजकुमार गुप्ता वाराणसी

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