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#आस्था_की_खिचड़ी गंगा में डुबकी लगा कर उत्तरायण सूर्य को भक्‍तों ने किया प्रणाम

#आस्था_की_खिचड़ी गंगा में डुबकी लगा कर उत्तरायण सूर्य को भक्‍तों ने किया प्रणाम

वाराणसी, । मकर संक्रांति पर बुधवार को भोर से ही धर्मानुरागीजनों ने गंगा में डुबकी लगा कर उत्तरायण सूर्य को प्रणाम किया। आराध्य देवों की दर पर मत्था टेका और दान-पुण्य कर रहे हैं। साथ ही देशज पकवानों का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। वहीं आसमान में मस्ती को डोर भी ढील दी। सवेरे से फिजा में भक्काटा .., ओ काटा.. जैसे जोशीले शब्द गूंजते रहे। संक्रांति के स्नानार्थियों की संख्या वैसे तो सभी घाटों पर रही मगर सड़क मार्ग से सीधे जुड़े दशाश्वमेध घाट, प्रयाग घाट, शीतलाघाट, आरपी घाट, गायघाट, मीरघाट, सिंधिया घाट, अस्सी घाट व पंचनद तीर्थ के रूप में मान्य पंचगंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंचे। पंचगंगा घाट के ऊपर प्रतिष्ठित बिंदु माधव मंदिर में भी श्रद्धालु पहुंचे।

प्रभु का ध्यान और तिल का नेवान

मकर संक्रांति के साथ ही प्रकृति ने भी भरपूर अंगड़ाई ली। नए मौसम, नई फसल, नए पत्र-पुष्पों और नई ताजगी का उपहार प्रभु के चरणों में अर्पित कर आस्थावानों ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। दूर-दराज से मोक्षदायिनी काशी में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी रस्म के अनुसार गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ की नगरी में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गंगा स्नान कर तिल-गुड़ दान करने से सुख व शांति संग अक्षय फल की प्राप्ति होती है। भारी भीड़ के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर के तीनों प्रवेश द्वार पर लंबी लाइन लगी और दिन भर यलो जोन की गलिया जाम रहीं।

हर तरफ तिल-गुड़

मंडियां और बाजार हमेशा की तरह शुक्रवार को भी सामग्रियों से पटे रहे मगर आज रुतबा किसी का था तो तिल-गुड़ से निर्मित लड्डू, तिलवा, तिलकुट सहित अन्य आइटम का। दशाश्वमेध, गोदौलिया, चेतगंज, जगतगंज, विश्वेश्वरगंज, सोनारपुरा, लंका, सुंदरपुर, वरुणापार क्षेत्र मेंभोजूबीर, अर्दली बाजार, पांडेयपुर, पहड़िया में तो तिल-गुड़, लइया, पट्टी, चूड़ा की अस्थाई दुकानें पग-पग पर दिखीं।

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