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बीजेपी-शिवसेना के फैसले पर सबकी निगाहें, मिलकर लड़े तो 220 सीटों पर फहर सकता है भगवा

बीजेपी-शिवसेना के फैसले पर सबकी निगाहें, मिलकर लड़े तो 220 सीटों पर फहर सकता है भगवा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद अब सबकी नजर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन पर टिक गई है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों लोकसभा चुनाव के वक्त से कह रहे है आमचं ठरलंय, यानी हमारा तय है। मगर अभी तक कोई अधिकृत बयान दोनों ही तरफ से नहीं आया।

सिर्फ सीट बंटवारे के नए-नए फॉर्मूले आ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस-एनसीपी ने 125-125 सीटों पर लड़ने की घोषणा कर दी है। 38 सीटें उन्होंने अपने सहयोगी दलों के लिए रखी है। जिनमें क्षेत्रीय दलों के साथ सपा भी शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव में प्रकाश आंबेडकर के भारिप बहुजन महासंघ और ओवैसी के एआईएम मिलकर वंचित बहुजन अघाड़ी झंडे तले मैदान में थे। विधानसभा चुनाव से पहले ये बंधन टूट गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसके टूटने से पहले अघाड़ी को राज्य में नंबर दो और कांग्रेस-एनसीपी को नंबर तीन बता रहे थे।

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव न लड़ने वाली आप विधानसभा में मैदान में उतरेगी जबकि उस वक्त सिर्फ बीजेपी-शिवसेना के विरुद्ध प्रचार करने वाले मनसे प्रमुख राज ठाकरे सोच में पड़े हैं कि विधानसभा में ताल ठोंकें या नहीं। हालांकि उनकी पार्टी के सूत्र 100 उम्मीदवारों के चुनाव में उतरने का दावा कर रहे हैं। मनसे को उम्मीद थी की कांग्रेस-एनसीपी उसे अपने गठजोड़ में शामिल करेंगी मगर कांग्रेस इसके बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

मिलकर लड़े तो 220 सीटों पर फहर सकता है भगवा

बीजेपी-शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी 2014 के चुनाव में अलग-अलग लड़े थे। तब बीजेपी को 122, शिवसेना को 63, कांग्रेस को 42, एनसीपी को 41 और अन्य को 20 सीटें मिली थी। इस बार बीजेपी-शिवसेना के अंदरूनी सर्वे मिलकर लड़ने पर 220 से ज्यादा सीटों का आंकड़ा छू रहे हैं।

मगर समस्या 2014 वाली ही है, सीट बंटवारे पर खींचतान। शिवसेना सीटों का 50-50 बंटवारा और जीतने पर पांच में से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहती है। जबकि जमीनी हालात बीजेपी को बिग ब्रदर बताते हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस चालाकी से बीते पांच साल में उद्धव ठाकरे को बड़ा भाई कह कर विश्वास में लिए रहे। जबकि पीएम मोदी ने इस महीने मुंबई यात्रा पर उद्धव को अपना छोटा भाई कहा। इस बीच संबंध बनाए रखने की परस्पर कोशिश में यह जरूर हुआ कि दोनों ने अपने-अपने नेताओं की बेवजह बयानबाजी पर लगाम लगाए रखी।

पहले की तरह उतनी मुखर नहीं है शिवसेना

शिवसेना पहले की तरह मुखर और आक्रामक नहीं है। उद्धव मौके की नजाकत समझ रहे हैं और इस चुनाव में उनकी महत्वाकांक्षा अपने बेटे आदित्य ठाकरे को राज्य की मुख्य धारा की राजनीति में स्थापित कर देने की है। पहला मौका है जब शिवसेना के संस्थापक परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में उतरेगा।

वहीं, आत्मविश्वास के रथ पर सवार बीजेपी के लिए तीन तलाक और कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद महाराष्ट्र चुनाव पहली परीक्षा है। अत: वह भी शिवसेना को ज्यादा नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकती।

शिवसेना में अंदर यह आशंका है कि बीजेपी कहीं 2014 के विधानसभा चुनाव की तरह ऐन मौके पर चुनाव-पूर्व गठबंधन न तोड़ दे। दोनों दलों में कार्यकर्ताओं को अंदर-अंदर सभी 288 सीटों पर चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

विधायकों की टूट से असमंजस में कांग्रेस-एनसीपी

कांग्रेस-एनसीपी अपने 30 से ज्यादा पूर्व और मौजूदा विधायकों के बीजेपी-शिवसेना में चले जाने के बाद असमंजस में हैं। इन नेताओं के जाने का नतीजा तो चुनाव बाद दिखेगा, मगर अभी दोनों पार्टियों में नेतृत्व का संकट है। लोकसभा में मिली हार से अभी दोनों दल, उनके नेता और कार्यकर्ता नहीं उबार सके हैं। अंदरूनी झगड़े अलग हैं। कांग्रेस अपने पूर्व मुख्य मंत्रियों और राज्य से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए मना रही है।

2014-किसको कहां क्या मिला

पश्चिम महाराष्ट्र (70)-बीजेपी 24, शिवसेना 13, कांग्रेस 10, एनसीपी 19, अन्य 04

विदर्भ (62)-बीजेपी 44, शिवसेना 04, कांग्रेस 10, एनसीपी 01, अन्य 03

मराठवाड़ा (46)- बीजेपी 15, शिवसेना 11, कांग्रेस 09, एनसीपी 08, अन्य 03

कोंकण (39)- बीजेपी 10, शिवसेना 14, कांग्रेस 01, एनसीपी 08, अन्य 06

मुंबई (36)-बीजेपी 15, शिवसेना 14, कांग्रेस 05, एनसीपी 00, अन्य 02

उत्तर महाराष्ट्र (35)-बीजेपी 14, शिवसेना 07, कांग्रेस 07, एनसीपी 05, अन्य 02

कुल (288)- बीजेपी 122, शिवसेना 63, कांग्रेस 42, एनसीपी 41, अन्य 20

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