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मानवता हुई शर्मसार, एंबुलेंस नहीं मिली, रिक्शा ट्राली से ले गया पत्नी का शव

प्रयागराज। शव ढोने के लिए सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता नहीं है और शव वाहन देने में हजार बहानेबाजी, इस सिस्टम में फंसे एक किसान की सिसकियां द्रवित करने वाली थीं। उसने गुहार लगाई, घंटों भटका, लेकिन मदद नहीं मिली। मायूस होकर उसने बच्चों को किसी तरह बस से घर भेजा। फिर गरीबी और लाचारी में एसआएन अस्पताल से रिक्शा ट्राली में पत्नी का शव रखकर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर शंकरगढ़ तक ले गया।


मानवता को शर्मसार कर देने वाली ये तस्वीर प्रयागराज के शंकरगढ़ की है जहाँ पर एक महिला की तबियत ख़राब होने पर उसके पति ने उसको अच्छे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करवाया की उसकी बीवी की तबियत ठीक हो सके मगर अचानक उसके बीवी की ज्यादा ख़राब हो गयी और उसकी मौत हो गयी।

डॉक्टरों ने उसे शव ले जाने को कहा तो उसने कहा कि एंबुलेंस मुहैया करा दी जाए क्योंकि उसको 45 किलोमीटर दूर जाना है मृत युवती के पति के मुताबिक डॉक्टरों ने उससे बात तक नहीं की तब बेचारा मजबूर होकर रिक्शा/ ट्राली पर अपने पत्नी का शव लेकर चल पड़ा शंकरगढ़ की तरफ। इस तस्वीरों से से जहां सरकार के दावे की पोल खुलती नजर आ रही है वहीं तस्वीरें मानवता को शर्मसार कर देने वाली लग रही है।


एसआरएन अस्पताल में पांच दिन पहले शंकरगढ़ से आए कल्लू ने पत्नी सोना देवी को सिर में लगी चोट का इलाज कराने को भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को उपचार के दौरान सोना की सांस उखड़ गई। पत्नी की मौत पर कल्लू बच्चों के साथ दहाडे़ं मारकर रोया। संयत हुआ तो घर तक शव ले जाने को साधन खोजने लगा।

एंबुलेंस मांगी नहीं मिली, बताया गया कि शव वाहन भी उपलब्ध नहीं है। निजी एंबुलेंस चालक तीन हजार रुपये मांगने लगे तो वह भटकने लगा। मजबूरी में उसने रिक्शा ट्राली पत्नी का शव रखकर घर की ओर निकल पड़ा। रास्ते में उसकी हालत देखने वालों ने अफसोस जताया लेकिन मदद को कोई आगे नहीं आया। यह घटना जिम्मेदारों के लिए सबक बन सकती है, बशर्ते वे संवेदनशील बनें। सवाल है कि सौ से अधिक एंबुलेंस का बेड़ा शहर में है, लेकिन जरूरतमंद गरीबों के लिए शव वाहन की व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में एसआएन अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने अनभिज्ञता जताते हुए कहाकि उनके पास कोई आया ही नहीं। कल्लू आते तो वह शव ले जाने की व्यवस्था जरूर कराते।

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