महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे ,आचार्य विनोबा भावे - प्रो. सुधीर प्रताप सिंह

महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे ,आचार्य विनोबा भावे -  प्रो. सुधीर प्रताप सिंह

विनोबा भावे की जयन्ती अवसर पर राजीव गांधी स्टडी सर्किल (गोरखपुर) के तत्वावधान में आयोजित बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. सुधीर प्रताप सिंह, हिन्दी विभाग, जे.एन.यू ., नई दिल्ली ने कहा कि विनोबा भावे जी गांधीजी के सच्चे उत्तराधिकारी थे। उन्होंने रामराज्य का स्वप्न देखा था, जिसमें भूदान, ग्रामदान, सम्पत्तिदान तथा मानव सेवा का आदर्श सम्मिलित था। महात्मा गाँधी जिस अहिंसा का आग्रह करते हैं, भूदान यज्ञ वास्तव में उसी अहिंसा क्रान्ति का दूसरा नाम है।प्रत्येक भूमिहीन परिवारों को 5-5 एकड़ भूमि दान करवाने का उनका लक्ष्य था। गांधी के सच्चे अनुयायी के रूप में मद्य निषेध तथा सामाजिक बुराइयों के लिए निरन्तर संघर्ष किया और भूदान आन्दोलन को जारी रखा।

अपने बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि विनोबा भावे धर्म को आध्यात्म से अलग मानते थे। उनकी दृष्टि में आध्यात्म व्यावहारिक व निरपेक्ष था। उनका विचार था कि अध्यमिकता को मानवता से जोड़कर ही उत्तम समाज का निर्माण किया जा सकता है।

भूदान आंदोलन के अलावा विनोबा (Acharya Vinoba Bhave) ने महिलाओं के उत्थान के लिए भी काफी कार्य किया। उन्होंने 1959 में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ब्रह्म विद्या मंदिर की स्थापना की। उन्होंने लोगों के बीच सादगी से जीवन गुजारने और चकाचौंध से दूर रहने को बढ़ावा देने के लिए कई आश्रम भी खोले।

उन्होंने अपने जीवन में कई किताबें लिखीं। उनकी ज्यादातर किताबें अध्यात्म पर थीं। मराठी, तेलुगु, गुजराती, कन्नड़, हिंदी, उर्दू, इंग्लिश और संस्कृत समेत कई भाषाओं पर उनकी पकड़ थी। उन्होंने संस्कृत में लिखे कई शास्त्रों का सामान्य भाषा में अनुवाद किया। उनकी लिखी किताबों में स्वराज्य शास्त्र, गीता प्रवचन, तीसरी शक्ति प्रमुख हैं।

कार्यक्रम को संचालित करते हुए , डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला , समन्वयक , राजीव गांधी स्टडी सर्कल (गोरखपुर ) ने कहा किज्यादा लोकप्रियता मिली। सामुदायिक नेतृत्व के लिए 1958 में रमन मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाले आचार्य विनोबा भावे पहले व्यक्ति थे। 1983 में मरणोपरांत उनको देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में श्री आलोक शुक्ला , श्री इंद्रजीत सिंह लीडर , डॉ रामकृष्ण, डॉ सत्यवान यादव , सुमित पाण्डे , कलांजय त्रिपाठी, अंशुमान पाठक, अजय कुमार मिश्रा, डॉ मोहम्मद मुस्तफा , गंगेश पांडेय , संतोष साहनी उपस्थित रहे।

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