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महाराष्ट्र: बीजेपी-शिवसेना के बीच रस्साकशी में सत्ता की चाबी एनसीपी के हाथ में

महाराष्ट्र: बीजेपी-शिवसेना के बीच रस्साकशी में सत्ता की चाबी एनसीपी के हाथ में
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महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान जारी है. शिवसेना 50-50 फॉर्मूले से एक कदम पीछे हटने को तैयार नहीं है तो बीजेपी सीएम पद को हर हाल में अपने पास रखना चाहती है. ऐसे में शरद पवार के नेतृत्व में 54 सीटें जीतने वाली एनसीपी के हाथों में महाराष्ट्र के सत्ता चाबी है. ऐसे में शरद पवार बीजेपी या शिवसेना में जिसके साथ खड़े हो जाएं, सीएम की कुर्सी उसके हाथ में होगी.

किंगमेकर की भूमिका में होने के बाद भी एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर एनसीपी के तमाम नेता सरकार बनाने से ज्यादा विपक्ष में बैठने को लेकर सहमत हैं. हालांकि छगन भुजबल ने शिवसेना को बीजेपी से नाता तोड़कर एनसीपी के साथ आने का निमंत्रण दिया है. एनसीपी के ऐसे स्टैंड पर सभी की निगाहें हैं. एनसीपी विपक्ष में बैठने पर कायम रहती है तो फिर शिवसेना के पास बीजेपी के साथ सरकार बनाने के सिवा कोई और विकल्प नहीं बचेगा.

शिवसेना महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद को लेकर अपने स्टैंड पर अभी तक कायम है. शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को एक बार फिर बीजेपी को गठबंधन धर्म निभाने की याद दिलाई और कहा कि बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले को निभाना चाहिए. साथ ही उन्होंने एनसीपी के साथ जाने की अटकलों पर भी अपने पत्ते खोले और कहा कि राजनीति में विकल्प खुले रहते हैं.

जबकि, बीजेपी प्रवक्ता जेवीएल नरसिम्हा राव ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में जल्द ही बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनेगी, जो पांच साल तक चलेगी. महाराष्ट्र बीजेपी प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा कि सीएम बीजेपी का था, है और आगे भी रहेगा. हमारे साथ 15 निर्दलीय विधायक हैं. छोटे दलों के कुछ और विधायक संपर्क में हैं.

महाराष्ट्र चुनाव नतीजे के दिन ही एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा था, 'शिवसेना को खुला ऑफर है कि वह हमारे साथ आ कर मुख्यमंत्री का पद लेकर सरकार बनाएं. शिवसेना को बीजेपी के साथ जाकर उपमुख्यमंत्री पद चाहिए या हमारे साथ आकर मुख्यमंत्री पद, ये तय कर ले.'

हालांकि, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने विधानसभा के नतीजे आने के बाद किसी के साथ जाने से साफ मना कर दिया है. शरद पवार ने यह कहकर शिवसेना के अरमानों पर पानी फेर दिया था कि उनकी पार्टी के सामने महाराष्ट्र में सरकार गठन करने का विकल्प नहीं है, लिहाजा वे जनादेश के मुताबिक विपक्ष में बैठेंगे. शिवसेना का समर्थन करने के सवाल पर पवार ने कहा, 'हमारे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है. लोगों ने हमें विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है. हम जनादेश को स्वीकार करते हैं.'

एनसीपी विपक्ष में बैठने के बयान पर कायम रहती है तो शिवसेना के मुख्यमंत्री पद के अरमानों पर पानी फिर सकता है. ऐसे में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के सिवा उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा, क्योंकि कांग्रेस के पास विधायकों की संख्या इतनी नहीं है कि वह अपने दम पर शिवसेना को समर्थन करके सरकार बनवा सके. हालांकि एनसीपी अगर बीजेपी के साथ चली जाती है तो बहुमत का आंकड़ा आसानी से पूरा हो रहा है. एनसीपी और बीजेपी मिलते हैं तो सरकार बनना तय है.

जबकि, शिवसेना सरकार कांग्रेस-एनसीपी की बदौलत ही बना सकती है. इस तरह से अगर एनसीपी शिवसेना के साथ खड़ी होती है तो उसे कांग्रेस के समर्थन की भी जरूरत होगी. शिवसेना और एनसीपी के मिलने के बाद 110 का आंकड़ा पहुंचता है, लेकिन बहुमत के लिए 145 विधायकों की संख्या होनी चाहिए. ऐसे स्थिति में कांग्रेस की रणनीति पर लोगों की नजर होगी.

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच जारी खींचतान के चलते ही नतीजे आने के 5 दिन बाद भी महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर एनडीए की ओर से पहल नहीं की गई है. जबकि हरियाणा में बहुमत के कम होने पर जेजेपी से साथ मिलकर सरकार बीजेपी ने बना ली है. ऐसे में बीजेपी और शिवसेना अपने-अपने समीकरण को दुरुस्त करने में जुटे हैं. ऐसे में देखना होगा कि महाराष्ट्र की सियासत किस करवट बदलती है.

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