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नन्हा सा सबक... : अभय सिंह

नन्हा सा सबक... : अभय सिंह

नन्हा सा सबक ।

हमें सीख दे जाता है ।।

हर दफ़ा यूँ ही बच्चे ।

जीवन में पाठ पढ़ा जाते है ।।

अक्सर अपनी समस्याओं के ।

कारण उन्हें नजर अंदाज कर देते हैं ।।

तभी तो तालमेल कभी-कभार ।

यूँ ही बिगड़ जाता है ।।

माना कि उम्र ढ़ल जाती है ।

सहनशक्ति कम हो जाती है ।।

कभी-कभार तबीयत नासाज सी लगती है

भूल कर सारी बातों को बर्दाश्त तो कर सकते है ।।

क्या मालूम कि जिसे महज बच्चा समझा?

वो ही एक दिन जीवन का सच्चा पाठ पढ़ा जाएगा ।।

अपनी गलती महहूस करने में क्या हर्ज है?

सबंध मधुर एवं अटूट निभाने का आपका ही फर्ज है ।।

दोषी तो किसी को ठहरा सकते हो ।

अपनी अंतरात्मा से खुद ही सवाल कर सकते हो ।।

बच्चों को दुलार एवं परिवार में संस्कार देना ।

वो कच्चे घड़े के समान,आप जैसे करें निर्माण ।।

निश्चित ही सहनशील बनना होगा ।

संस्कार,व्यवहार,आदर्श का बीज बोना होगा ।।

दरअसल जीवन की जद्दोजहद में ।

उतार चढ़ाव तो आना तो स्वभाविक है ।।

नाराजगी,मान-मनौवल का प्रयास ।

खुशिओं के लिए करना पड़ता है ।।

ध्यान हमेशा यही हो ।

आज्ञा का न उलंघन हो ।।

अपने बच्चों के चेहरों पर ।

मुस्कान सदैव मन से हो ।।

यदा-कदा बाल सुलभ मन ।

भी हमें जीवन में सीख दे जाता है ।।

और उनके संवाद हमें अचंभित ।

कर ताऊम्र याद आ जाते है ।।

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