मुस्लिम परिवार की स्टूडेंट का शरीर फाँसी के फंदे पर लटका मिला, वो कैसे थी हिन्दू दलित

मुस्लिम परिवार की स्टूडेंट का शरीर फाँसी के फंदे पर लटका मिला, वो कैसे थी हिन्दू दलित

एक मेडिकल कॉलेज में एक स्टूडेंट मृत पाई गयी। उसका शरीर फाँसी के फंदे पर लटका हुआ था। प्रथमदृष्टया सबको लगा कि उसने आत्महत्या की है। पर कुछ चीजें अलग थीं, जैसे उसने कोई सुसाइट नोट नहीं छोड़ा था, और उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोट के निशान थे।

अब लड़की के परिवार के बारे में जानिए। लड़की की माँ आबिदा तड़वी मुश्लिम है, पिता सलीम तड़वी मुश्लिम हैं, और पतिदेव डॉ सलमान भी मुश्लिम हैं। पर लड़की हिन्दू थी। और उसमें भी हिन्दू दलित थी। एक मुश्लिम माता-पिता की संतान हिदू कैसे हो गयी यह बात कम से कम मुझे समझ मे नहीं आती, दूसरों की कह नहीं सकता।

एक बात और, लड़की दलित कही जा रही है इसका मतलब यह है कि उसने कॉलेज में sc कोटे में नामांकन पाया होगा। क्यों? कैसे? इसका उत्तर किसी के पास नहीं। भारत मे दलितों के लिए आरक्षित सुविधाओं का लाभ कैसे दूसरे लोग ले रहे हैं, इसका एक नमूना भर है यह कांड।

अब आगे का खेल देखिये। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि गले पर किसी चीज की गहरी चोट है जिससे लगता है कि हत्या करने के बाद उसे फाँसी पर लटका दिया गया है।पर मीडिया इसे आत्महत्या बता रही है। और कहानी यह गढ़ी गयी है कि उसकी कक्षा की तीन लड़कियों ने उसे जातिसूचक शब्दों से बुलाया, जिसके कारण लड़की ने आत्महत्या कर ली। अर्थात मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक पूर्ण परिपक्व लड़की ने केवल तीन लड़कियों द्वारा जातिसूचक शब्दों से सबोधित किये जाने के कारण आत्महत्या कर लिया।

अब आप सोच कर देखिये, क्या यह कहानी सच लगती है? क्या आपको लगता है कि मेडिकल स्टूडेंट ने आत्महत्या की? नहीं न!

लेकिन आगे का तमाशा देखिये। बीसियों संगठन खड़े हो गए, सारे वामपंथी छात्र संगठन आगे आये और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा कर उन तीन स्टूडेंट्स के विरोध में आंदोलन प्रारम्भ हो गया। इसे दलित उत्पीड़न बताया जाने लगा, ब्राह्मणों को गाली दिया जाने लगा, दलितों पर अत्याचार का रुदन प्रारम्भ हो गया...

और यह सब हुआ इसलिए, ताकि हत्या का आरोप स्वाभाविक रूप से उसके पति डॉ सलमान पर न लगे। ठीक उसी तरह जिस तरह निर्भया कांड में मुख्य आरोपी अफरोज को बचाने के लिए नौटंकीबाजो ने हजार तर्क गढ़ लिए थे... डॉ सलमान को बचाने के लिए तीन लड़कियों की बलि चढ़ाने का प्लान बन चुका।

फल यह हुआ कि डॉ पायल तड़वी को आत्महत्या के लिए उकसाने के नाम पर तीन डॉक्टर्स को आरेस्ट किया गया और उन्हें पुलिस हिरासत में रखा गया है। इन तीन लड़कियों भक्ति मेहर, अंकिता खण्डेलवाल और हेमा आहूजा का दोष यह है कि वे सामान्य वर्ग से हैं।

पुलिस कस्टडी में जमीन में बैठी इन तीन डॉक्टरों की तस्वीर देखिये और अंदाजा लगाइये कि इस देश की कानून व्यवस्था का कितना पतन हो चुका है। सोचिये कि इस देश मे न्याय की अवधारणा के साथ किस तरह बलात्कार किया जा रहा है।

और यह भी सोचिये कि क्या ऐसा ही देश बनाना चाहते थे हम? कुछ दिन पहले एक कविता लिखी थी इस व्यवस्था पर। याद है?

सर्वेश तिवारी श्रीमुख

गोपालगंज, बिहार।

Share it
Top