व्यंग : कुतर गये पर - : कृष्णेन्द्र राय

व्यंग : कुतर गये पर - : कृष्णेन्द्र राय

काम हुआ चालू ।

वर्मा जी ऑन ।।

हाथ पर बँधे ।

घट गयी शान ।।

जीत गये जंग ।

गायब पर रौनक़ ।।

कुतर गये पर ।

छिन गया हक ।।

धूमिल हुई तमन्ना ।

पर करना स्वीकार ।।

ताक़त का खेल ।

कितने हैं प्रकार ?

व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

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