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घर लौटे मजदूरों के लिए मोदी सरकार सोशल वेलफेयर और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम को तेजी से मिशन मोड में चलाएगी

घर लौटे मजदूरों के लिए मोदी सरकार सोशल वेलफेयर और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम को तेजी से मिशन मोड में चलाएगी

मोदी सरकार ने लॉकडाउन के कारण रोजी-रोटी और रोजगार गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए मेगा प्लान तैयार किया है. केंद्र सरकार ने देश के 6 राज्यों के उन 116 जिलों की पहचान की है, जहां लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं.

अब सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है. इसके तहत कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों और गांवों को लौटे करोड़ों प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए पूरा खाका तैयार किया गया है. अब सरकार इन 116 जिलों में केंद्र सरकार के सोशल वेलफेयर और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम को तेजी से मिशन मोड में चलाएगी.

इसका मकसद है कि घर लौटे प्रवासियों के लिए आजीविका, रोजगार, कौशल विकास और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके.

इन जिलों में मनरेगा, स्किल इंडिया, जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम होगा.

इसके अलावा, हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बाकी केंद्रीय योजनाओं को भी निश्चित तरीके से लागू किया जाएगा.

केंद्र सरकार के मंत्रालयों को भी कहा गया है कि दो हफ्ते में इन जिलों को ध्यान में रखकर योजनाओं का प्रस्ताव तैयार करके पीएमओ भेजें.

केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं. उसके बाद यूपी के 31 जिले हैं. मध्य प्रदेश के 24, राजस्थान के 22 जिले, झारखंड के 3 और ओडिशा के 4 जिले हैं.

बता दें कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. लॉकडाउन के दौरान काम-धंधा बंद होने के वजह से श्रमिकों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया.

इसकी वजह से देशभर में श्रमिकों को पलायन शुरू हो गया. गांव घर लौटने के दौरान भी श्रमिकों को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ा. इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने कुछ अहम कदम उठाने जा रही है ताकि घर लौटे श्रमिकों के रोजगार का इंतजाम किया जा सके.

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