सख्त जबरदस्त... रिवेश प्रताप सिंह

सख्त जबरदस्त... रिवेश प्रताप सिंह

'सख्त' शब्द बहुत वास्तव में 'सख्त' होता है.. इसीलिये तो, जब लोग मना करने पर नहीं मानते तब मिटाकर दुबारा यह लिखना पड़ता है कि "यहाँ पेशाब करना सख्त मना है' लोग बताते हैं कि जब कोई मोहब्बत से पेश आने पर भी बाज़ न आये तब उस पर सख्ती से पेश आया जाता है. अपने ही अनचाहे बालों को उखाड़ना, सख्ती का एक देखा- सुना बहुत सुलभ और पारिवारिक उदाहरण है..आप उसको थ्रेडिंग भी कह सकते हैं जी..

आपको तो मालूम ही है कि साढ़ को बैल बनाने की प्रकिया में उस पर दो बार सख्ती दिखाई जाती है एक बार शरीर के पिछले भाग में तथा दूसरी बार नाक में नकेल कसकर, तब जाकर कोई बिगड़ैल साढ़, बैल बनता है।

यह ठीक है कि सख्ती सुस्त कर देती है, कलेजे में भय भर देती है महीनों कदम बांध कर रखती हैं फिर आप थकहार कर खुदबखुद उस ढ़ांचे में फिट हो जाते हैं.

अब महत्वपूर्ण बात यह कि आप सख्ती या सख्त चीजों को कैसे लेते हैं. कुछ लोग सख्त चीजों को लेकर बहुत सहज होते हैं.. कुछ आनन्द भी लेते हैं लेकिन एक बड़ी आबादी सख्त चीजों को देखकर घबरा जाती है. उन्हें लगता है कि वो खुद को इस सख्ती में समर्पित कर देंगे तो टूट जायेंगे. सह नहीं पायेंगे.. छितर जायेंगे. वजह यह कि सभी की चमड़िया इतनी खुरदरी नहीं होतीं कि वो सख्त चीजों का सख्ती से सामना कर लें इसलिए वो घबराकर विचलित हो जाते हैं।

वैसे कुछ सख्तियां खुद द्वारा उपार्जित होतीं हैं इसलिए उसमें मजा, हो न हो मजे जैसा मुंह बनाना पड़ता है.. वजह यह कि जब आप उन सख्तियों पर चीखेंगे तो आप पर लोग हंसेंगे. ऐसे में सख्त चीजों का सामना करने पर मुंह और जुबान बंद करने का साहस खुदबखुद आ जायेगा यह बिल्कुल उसी तरह है कि आप अपनी लाठी को पूरे अठ्ठारह साल तेल पिलाकर जवां किये हों. उसकी जवानी और चमक पर इतरायें और बलखायें हों.. उसको लेकर पूरे खेत-जवार, नात रिश्तेदार टहलें हों.. उसके बल पर न जाने कितनी लड़ाईयाँ लड़े हों और एक दिन वही लाठी किसी अपने के हाथ आपकी पीठ और आपके जंघे पर बरसने लगे... सच! आप बेइंतिहा तकलीफजदा होंगे लेकिन फिर भी आपको अपने तकलीफ़ से ज्यादे उस लाठी पर गुमान होगा जिसकों आपने तेल पिलाकर इतना सख्त, मजबूत और जवां बनाया कि आज वो आपकी भी सख्ती से खबर ले रहा है॥

रिवेश प्रताप सिंह

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