लभ यू तीन गोरियां.... आलोक पाण्डेय

लभ यू तीन गोरियां....  आलोक पाण्डेय

'बिन मारे बैरी मरे' की खुशी को दबाते हुए आइए सुनते हैं कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश अखंड भारत के भाग रहे हैं, अब क्योंकि ये भारत के विखंड हैं, इसलिए ये भारत के शाश्वत बैरी बरीबंड हैं।

वास्तव में संसार बैरियों के बरियाई का बेर है, बैरियर है, बैरिकेडिंग है।

जिसको 'राष्ट्र' नाम से जाना जाता है... साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं पारमेष्ठ्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं समन्तपर्यायी स्यात् सार्वभौम: ....

यह सार्वभौम जगत् विभाजनों से उपजे अपने-अपने अधिकारों के द्वंद्वों के अंधवाद की कहानी है और उसी के लाभ का नाम ही विकास है, विस्तार है, जय है।

तो भारत के इन तीन खंडों बांग्लादेश, पाकिस्तान और गिलहरी जैसे ही सही अफगानिस्तान के क्रिकेट विश्वकप-२०१९ में भारत के लिए परेशानी का कारण हो सकते आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका को हराना, उन पर अंकुश लगाना, उन सबके रनों की रफ़्तार को कम करना, आपस में भी एक, दूसरे और तीसरे के साथ ऐसा ही करना और इसी प्रकार तीनों का बारी-बारी भारतसे हार जाना, भारत को अंक तालिका में दूसरे पायदान तक पहुंचाना तत्पश्चात् हमारे चौथे पड़ोसी, रामायण काल के बैरी श्रीलंका का विभीषण जी का रोल निभाना और भारत को टाप पर पहुंचाना, जगत् विभाजनों से उपजे अपने-अपने अधिकारों के द्वंद्वों के अंधवाद की कहानी है और उसी के लाभ का नाम ही विकास है, विस्तार है, जय है।

पर पारे प्यारे मित्रों!

दक्षिण अफ्रीका के योगदान को भी कहीं से कम करके नहीं आंका जा सकता।

यूरोप के अश्वेतवादी नीतियों से सालों तक अपार्थिड रेसियलिज्म के दंश को झेले इस देश को भारत ने अपने प्रभाव से बलात् १९८८-८९ में विश्व क्रिकेट में पुनर्वापसी कराया था और तबसे भारत को जब-जब अंको की आवश्यकता पड़ती रही है दक्षिण अफ्रीका ने भले चोकर्स का अभिशाप अपने माथे पर लगवा लिया लेकिन भारत की प्रतिष्ठा पर कभी आंच नहीं आने दिया।

याद करिए हीरो कप-९३ का सेमीफाइनल भारत, १९५ रन पर आलाउट हो गया था और हमारा प्रिय साउथ अफ्रीका इतना घटिया खेला कि अंतिम ओवर में चार विकेट शेष रहते हुए छः रन बनाने थे। कप्तान सट्टेबाज मोहम्मद अजहरुद्दीन ने गेंद कपिल देव को थमा दिया और घबड़ाए कपिल ने वह गेंद सचिन तेंदुलकर की ओर उछाल दिया। बच्चा तेंदुलकर ने जो धारदार गेंदबाजी की कि भारत दो रन से वह मैंच जीत गया था।

याद करिए २००७ का ट्वेंटी-ट्वेंटी विश्व कप।

कैसे यह बेचारा देश भारत से अपने ही देश में ऐसा बुरा हारा था कि खुद क्वालिफाई केवल इसलिए नहीं किया कि कहीं फाइनल-वाइनल में भारत को हरा दिया तो?

रोहित शर्मा के जिन पांच शतकों पर आज जो पूरा भारत फूले नहीं समा रहा है।

याद करिए कि लीग के पहले मुकाबले में रोहित शर्मा का कैच गिराकर उससे शतक लगवाने की परम्परा का यदि साउथ अफ्रीका ने श्रीगणेश नहीं करवाया होता तो श्रीलंका को छोड़कर और तीन देशों, पाकिस्तान, इंग्लैंड और बांग्लादेश आंख मूंद कर, कैच गिरा-गिरा-गिराकर इस परम्परा का कैसे अनुगमन करते?

दक्षिण अफ्रीका द्वारा शुरू की गई इस परम्परा को युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय स्मरण रखेगा।

कल लीग के अंतिम मुकाबले में भारत ने जब श्रीलंका को आसानी से हराकर अंकतालिका में शीर्ष पर पहुंचा तो रोहित शर्मा और के एल सहगल? ना ना के एल राहुल को ग्राउंड में शतक बनाने के लिए छोड़ कर, पूरी भारतीय टीम पैवेलियन में आस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका का मैच देख रही थी...... धोखा इसी को कहते हैं।

... और यह पूछने पर कि सेमीफाइनल में किससे भिड़ना पसंद करेंगे तो जैसे पोपटवत् सब एक ही उत्तर रटे हुए थे कि कोई भी हो, हमको क्या... मौका इसको कहते हैं।

...और आस्ट्रेलिया वाले साउथ अफ्रीका को चोकर्स के भरम में ले बैठे थे। फिर क्या हुआ, साउथ अफ्रीका ने उनको जो पटकनिया दिया है कि अब वे जा कर गिरे हैं इंग्लैंड के सामने सेमीफाइनल में।

अब तेरा क्या होगा गोरियों!

.... दो गोरियों के मुकाबले में इंग्लैंड तुमको हराएगी और जो नहीं हराई तो ऐ थके हारे कंगारूओं तुम को दक्षिण अफ्रीका की २००३ कसम, फाइनली हम तुम्हें अवश्य हराएंगे, तीसरी चोर गोरी न्यूजीलैंड को सेमीफाइनल में पहुंचने की सजा सुनाएंगे!

आलोक पाण्डेय

बलिया उत्तरप्रदेश

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