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आधुनिक भारत के जनक , राजीव गांधी को कोटिशः नमन : डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला

आधुनिक भारत के जनक , राजीव गांधी को कोटिशः नमन : डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला


राजीव गांधी स्टडी सर्किल, गोरखपुर के समन्वयक ,डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला ने आधुनिक भारत के जनक पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी जी के पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि प्रख्यात इतिहासकार रामचन्द्र गुहा ने अपनी पुस्तक,' इंडिया आफ्टर गांधी में राजीव गांधी के हवाले से लिखा है,

राजीव ने कुछ सेक्टर्स में सरकारी नियंत्रण को खत्म करने की कोशिश भी की ।यह सब 1991 में बड़े पैमाने पर नियंत्रण और लाइसेंस राज के खात्मे की शुरुआत थी।

राजीव ने इनकम और कॉर्पोरेट टैक्स घटाया, लाइसेंस सिस्टम सरल किया और कंप्यूटर, ड्रग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों से सरकारी नियंत्रण खत्म किया।साथ ही कस्टम ड्यूटी भी घटाई और निवेशकों को बढ़ावा दिया।बंद अर्थव्यवस्था को बाहरी दुनिया की खुली हवा महसूस करवाने का यह पहला मौका था. आर्थिक उदारवाद का प्रथम चरण था।

डॉ शुक्ला ने कहा दृढ़ प्रतिज्ञ राजीव गांधी ने दिसंबर 1988 में चीन की यात्रा की। यह एक ऐतिहासिक कदम थे । इससे भारत के सबसे पेचीदा पड़ोसी माने जाने वाले चीन के साथ संबंध सामान्य होने में काफी मदद मिली। 1954 के बाद इस तरह की यह पहली यात्रा थी। सीमा विवादों के लिए चीन के साथ मिलकर बनाई गई ज्वाइंट वर्किंग कमेटी शांति की दिशा में एक ठोस कदम थी।

राजीव के चीनी प्रीमियर डेंग शियोपिंग के साथ खूब पटरी बैठती थी। कहा जाता है राजीव से 90 मिनट चली मुलाकात में डेंग ने उनसे कहा, तुम युवा हो, तुम्हीं भविष्य हो।अहम बात यह है कि डेंग कभी किसी विदेशी राजनेता से इतनी लंबी मुलाकात नहीं करते थे।

राजीव गांधी के 'पावर टू द पीपल ' आइडिया को उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को लागू करवाने की दिशा में कदम बढ़ाकर लागू किया। कांग्रेस ने 1989 में एक प्रस्ताव पास कराकर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने की दिशा में कोशिश की थी. 1990 के दशक में पंचायती राज वास्तविकता में सबके सामने आया।

सत्ता के विकेंद्रीकरण के अलावा राजीव ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 1989 में 5 दिन काम का प्रावधान भी लागू किया।ग्रामीण बच्चों के लिए प्रसिद्ध नवोदय विद्यालयों के शुभारंभ का श्रेय भी राजीव गांधी को जाता है।

नवोदय विद्यालय जैसी आधुनिक शैक्षणिक संस्था के पूरे देश का प्रयोग के साथ ही भारतीय संचार क्रांति, कम्प्यूटर क्रान्ति के जनक,

राजीव गांधी के भाषणों में हमेशा 21वीं सदी में प्रगति का जिक्र हुआ करता था. उन्हें विश्वास था कि इन बदलावों के लिए अकेले तकनीक ही सक्षम है।उन्होंने टेलीकॉम और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में विशेष काम करवाया।

सिक्के वाले फोन जो मोबाइल से चलते अब अतीत में बदल चुके हैं. राजीव को अगले दशक में होने वाली तकनीक क्रांति के बीज बोने का श्रेय भी जाता है. उनकी सरकार ने पूरी तरह असेंबल किए हुए मदरबोर्ड और प्रोसेसर लाने की अनुमति दी. इसकी वजह से कंप्यूटर सस्ते हुए।ऐसे ही सुधारों से नारायण मूर्तिऔर अजीम प्रेमजी जैसे लोगों को विश्वस्तरीय आईटी कंपनियां खोलने की प्रेरणा मिली।

भारत के इस युवा प्रधानमंत्री ने युवाभारत की परिकल्पना के अनुरूप

मतदान उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 साल करने के राजीव गांधी के फैसले से 5 करोड़ युवा मतदाता और बढ़ गए। इस फैसले का कुछ विरोध भी हुआ।

लेकिन राजीव गांधी को यकीन था कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवाशक्ति का दोहन जरूरी है। इस भविष्य दृष्टा की जयंती सद्भावना दिवसऔर अक्षय ऊर्जा दिवस के तौर पर मनाई जाती है । आज़ाद भारत स्व. राजीव गाँधी के महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

हे महामानव ,आपको कोटिशः नमन 🙏

डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला

समन्वयक, राजीव गांधी स्टडी सर्किल, गोरखपुर, उत्तरप्रदेश

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