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दिल्ली चुनावों को लेकर "श्रीमुख" का आकलन

दिल्ली चुनावों को लेकर श्रीमुख का आकलन

दिल्ली चुनावों को लेकर लोग बाग अंदाजा लगा रहे हैं। सीटों तक के आंकड़े तय हो रहे हैं। इसमें मेरा अपना भी एक आकलन है।

दिल्ली में या तो EVM हैक होगी, या हमारी नैतिक विजय होगी। वसन्त का महीना है, वैलेंटाइन का सप्ताह, हारेंगे तो हुरेंगे जीतेंगे तो थुरेंगे। जीत गए तो राजा बनेंगे, सत्ता अपनी! हार गए तो जीतने वाले को बड़ा मान कर भइया कहेंगे, तब सरकार हमारी भउजाई होगी और हम प्यारे देवर... फिर पाँच वर्ष तक आराम से सरकार के दुआर पर फगुआ गाएंगे, "नकबेसर कागा ले भागा, मोर सइयाँ अभागा ना जागा..."

हमारी पीड़ा बस यह है कि हमारा प्रदेश अध्यक्ष तनिक 'चवन्नी लहर' मारता है। फिर भी कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि उस ओर भी "तास का तिरपनवां पत्ता" ही राजा है। वस्तुतः दिल्ली चुनाव, चुनाव नहीं तिरहुतिया नाच का स्टेज बना हुआ है। एक ओर जोकर है, दूसरी ओर लौंडा... बीच में नगाड़ा वाला ताल दे रहा है, दम्मड़ दम्मड़ दम्मड़ दम्मड़...

इस चुनाव में भाजपा का मामला बस एक ही जगह गण्डगोल हुआ है। किसी भी तरह यदि इस 'रोज डे' में डॉ. कुमार विश्वास को अपना फूल पकड़ाने में सफल हो गए होते तो वेलेंटाइन अपना होता। पर डॉक्टर साहब भी मजे हुए खिलाड़ी हैं, सौ घाट का पानी भले न पिये हों पर जिस एक घाट का पिये हैं वह घाट ही सौ नदियों के मिलन स्थल पर बना था। वे आसानी से 'यस' नहीं बोलेंगे। खैर...

इधर से ज्यादा खराब मामला उधर है। उधर वाले साहब अपने इश्क की सरकार तो बनाना चाहते हैं, पर उनकी पुरानी "प्रेम कहानियाँ" बीच में रोड़ा डाल रही हैं। बेचारे केजरीवाल सर! पहले उस पाकिस्तानी मंत्री ने इनके लिए वोट मांग कर चोट दे दिया। बेचारे गाली देते रह गए, पर जितना कटना था उतना कट ही गया... अभी उस घाव पर मलहम लगा रहे थे तबतक शाहीन बाग वालों ने समर्थन कर के और घाव दे दिया। अब यहाँ दिक्कत यह है कि उनको गाली भी नहीं दे सकते, और उनके समर्थन के कारण जो कटना था वह फिर कट गया...

केजरीवाल सर इस वेलेंटाइन के एकमात्र ऐसे प्रेमी हैं, जो गुलाब देख कर गाली दे रहे हैं। प्रेमिकाएं फूल ले कर पीछे पड़ी हैं, प्रेमी जान बचा कर भाग रहा है। वह चिल्ला कर कह भी नहीं सकता कि रुक जाओ, बीबी देख रही है... समर्थक समर्थन दे रहे हैं, बेचारे नेता का चुटिया कट रहा है... ऐसे दुर्दिन कभी नहीं आये थे।

कुछ दिन पहले हम दिल्ली गए थे। वहाँ के मित्रों से पूछे, "केजरीवाल सर ने बिजली-पानी फ्री कर दिया है, अब तो आपलोग वोट 'आप पार्टी' को ही देंगे?" मित्रों ने दुखी हो कर कहा था, "बिजली-पानी किसे चाहिए मालिक! फ्री में गर्लफ्रेंड दिलाते तब न बात बनती... केजरीवाल सर ने सिंगलों के लिए कुछ नहीं किया, उन्हें वोट नहीं देंगे।" सिंगलों की पीड़ा भी अजीब है... छोड़िये भी!

वैसे इस स्वयंबर में एक दूल्हा ऐसा भी है जिसे कोई नहीं पूछ रहा। बेचारे राहुल सर... हमारे बिहार में जब किसी लड़के का विवाह नहीं होता तो वह बंगाल की ओर देखता है। राहुल जी मिलते तो कहता... वैसे एक बात तय है, दिल्ली में केजरीवाल जीतें या मनोज, राहुल जी को अंडा ही मिलेगा।

खैर छोड़िये! चुनाव का जो होना होगा वह होगा, पर परसो से फागुन चढ़ रहा है और फागुन भर हम वामपंथी होते हैं। परत नहीं पढ़े हों तो मंगा के पढ़ लीजिये, नहीं तो फगुआ कहीं आपके ही दुआर पर न हो जाय...

सर्वेश तिवारी श्रीमुख

गोपालगंज, बिहार

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