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सामाजिक-आर्थिक सेक्टर : बढ़ेगी खुशहाली (धीरेन्द्र कुमार दुबे)

सामाजिक-आर्थिक सेक्टर : बढ़ेगी खुशहाली    (धीरेन्द्र कुमार दुबे)


वर्ष 2019 में भारत की आर्थिक संभावनाओं पर प्रकाशित हुई कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्टों में कहा गया है कि आर्थिक चुनौतियों के बीच भी 2018 की तुलना में 2019 में भारत का आर्थिक परिदृश्य बेहतर होगा। वर्ष 2019 में भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आकार बढ़ेगा। परिणामस्वरूप भारत की विकास दर भी 7.5 फीसद से अधिक संभावित होगी। निश्चित रूप से नये वर्ष 2019 की शुरुआत से ही देश की अर्थव्यवस्था के परिदृश्य पर किसानों की कर्ज मुक्ति और किसानों के लिए विभिन्न उपहारों के लिए बड़े-बड़े प्रावधान दिखाई देंगे। केंद्र सरकार लघु एवं सीमांत किसानों की आय में कुछ बढ़ोतरी करने की नई योजना भी ला सकती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों की कर्ज माफी के वचन से कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद अन्य प्रदेशों की सरकारों और केंद्र की मोदी सरकार पर भी किसानों के कर्ज को माफ करने का दबाव बना है। यदि केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कर्ज माफी की जाती है, तो इससे उसपर चार लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यय होगा।

वर्ष 2019 से नई कृषि निर्यात नीति लागू होने से किसानों व कृषि क्षेत्र को काफी लाभ होंगे। नई कृषि निर्यात नीति के तहत कृषि निर्यात को मौजूदा 30 अरब डॉलर के मूल्य से बढ़ाकर 2022 तक 60 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचाने और भारत को कृषि निर्यात से संबंधित दुनिया के 10 प्रमुख देशों में शामिल कराने का लक्ष्य रखा गया है। नई कृषि निर्यात नीति में खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, दूध, चाय, कॉफी जैसी वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने और कृषि उत्पादों के ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर फोकस किया गया है। इसके अलावा कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने, प्रोडक्ट के मानक तय करने जैसे कदम भी बताए गए हैं। निर्यात बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर विशेष क्षेत्र बनाए जाएंगे और बंदरगाहों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी। इनके लिए सरकार ने 1,400 करोड़ रु पये के निवेश का प्रावधान किया है। यद्यपि कृषि निर्यात को आगामी चार वर्षो में दो गुना करने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इस समय भारत में कृषि निर्यात की विभिन्न अनुकूलताओं के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 में देश में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन हुआ है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। भैंस के मांस, पालतू पशुओं और मोटे अनाज के मामले में भी भारत सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत का फलों और सब्जियों के उत्पादन में दुनिया में दूसरा क्रम है। निसंदेह वर्ष 2019 में जीएसटी संबंधी मुश्किलों कम होगी और अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेंगे। देश और दुनिया के अधिकांश अर्थविशेषज्ञों के विश्लेषणों में यह बात उभरकर सामने आ रही है कि जीएसटी भारत के लिए लाभप्रद कदम है, लेकिन उपयुक्त क्रियान्वयन के अभाव में जहां इनका लाभ अर्थव्यवस्था को पर्याप्त रूप में नहीं मिल पाया।

वैश्विक संगठनों ने कहा कि आर्थिक विकास दर सुस्त रहने की एक प्रमुख वजह जीएसटी का लागू होना है। यद्यपि विकास दर में कमी जीएसटी के पहले भी आना शुरू हो गई थी लेकिन जीएसटी ने इसमें तेजी ला दी। सरल जीएसटी के कारण देश की अर्थव्यवस्था और तेज गति से आगे बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि शुरुआत में जीएसटी के कारण जो विकास दर घटी है, वह 2018 में बढ़ी है और अब 2019 में और अधिक तेजी से बढ़ेगी। ऑल इंडिया मैन्युफैक्र्चस ऑर्गेनाइजेशन (एआईएमओ) एक सर्वे के मुताबिक 2017 एवं 2018 में जीएसटी लागू किए जाने से नौकरियों में कमी आई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मिनी स्ट्रीट मेमो रिपोर्ट 2018 में कहा गया है कि जीएसटी से छोटे उद्योग-कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम के द्वारा लिखी नई किताब ''ऑफ काउंसिल : द चैलेंजेस ऑफ द मोदी-जेटली इकोनॉमी' में कहा गया है कि जीएसटी लागू किए जाने के लिए और अधिक तैयारी की जानी थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में जीएसटी एक दूरगामी आर्थिक सुधार था। जहां अब इस आर्थिक सुधार से संबंधित प्रारम्भिक मुश्किलें कम होने लगी हैं, वहीं अर्थव्यवस्था के परिदृश्य पर विकास दर बढ़ती हुई दिखाई देगी। वर्ष 2019 में भारत विकास दर के मामले में दुनिया में पहले क्रम पर दिखाई देगा।इसमें कोई दो राय नहीं कि उद्योग-कारोबार और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में वर्ष 2018 में जो सुधार हुए हैं, उनमें अब जीएसटी के सरलीकरण से इन क्षेत्रों में 2019 में भारत की कई उपलब्धियां रेखांकित होती हुई दिखाई दे सकती हैं।

विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में भारत को 190 देशों की सूची में 77वां स्थान दिया गया। यह रैंकिंग रिपोर्ट 2019 में बढ़ सकती है। विश्व प्रतिस्पर्धा केंद्र रिपोर्ट 2018 के अनुसार 63 देशों की नियंतण्र प्रतिस्पर्धी रैंकिंग में भारत 44वें स्थान पर रहा। वर्ष 2019 में इस रैकिंग में भी भारत आगे बढ़ सकता है।

वैश्विक ''प्रत्यक्ष विदेशी निवेश विश्वास सूचकांक-2018' में 25 देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भारत को 11वां स्थान प्राप्त हुआ। वर्ष 2019 के आर्थिक परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिए कई बातों पर ध्यान दिया जाना जरूरी होगा। 2019 में उद्योग-कारोबार के लिए जीएसटी को और सरल बनाना होगा। टैक्स रिफंड के लिए मैन्युअल रिकॉर्ड और प्रक्रिया की बड़ी खामी को दूर करना होगा। वास्तविक व्यवहार में आ रही जीएसटी दरों से संबंधित कई उलझनों का निराकरण किया जाना होगा।

वर्ष 2018 में जीएसटी पोर्टल को अधिक कार्यक्षम बनाना होगा। दिसम्बर 2018 में जीएसटी की स्लैब चार से घटाकर तीन किए जाने पर जो विचार मंथन हुआ है, उसे 2019 में अमलीजामा पहनाया जाना होगा। 28 फीसद की श्रेणी का सूर्यास्त किया जाना चाहिए और 12 व 18 फीसद की दर का विलय करके एकल मानक दर बनाई जानी चाहिए। एक विवरणी दाखिल करने की सुविधा पर भी विचार किया जाना चाहिए। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि आयकर एवं प्रत्यक्ष कर पर गठित नया कार्यबल निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दे। इसके आधार पर सरकार एक प्रभावी प्रत्यक्ष कर पण्राली के तहत प्रत्यक्ष कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी बनाए। हम आशा करें कि सरकार के द्वारा वर्ष 2019 में विभिन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच भी कृषि, उद्योग, बैंकिंग करारोपण, निर्यात और निवेश के परिदृश्य को अनुकूल बनाने के लिए उपयुक्त रणनीतिक कदम आगे बढ़ाए जाएंगे।

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