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कैसे करें कन्या पूजन? नवरात्रि अष्टमी की पूजा विधि, मां महागौरी के मंत्र

कैसे करें कन्या पूजन? नवरात्रि अष्टमी की पूजा विधि, मां महागौरी के मंत्र
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इस बार आठ दिन की ही नवरात्रि हैं। जिस कारण कई लोगों को ये कंफ्यूजन है कि अष्टमी 13 अक्टूबर को है या फिर 14 को है? ये दोनों ही तिथियां इसलिए खास है क्योंकि कोई अष्टमी के दिन कन्या पूजन करके नवरात्रि व्रत का पारण करता है तो कोई नवमी के दिन। बता दें पंचांग अनुसार इस बार आठवां नवरात्र 13 अक्टूबर को है और नौंवा नवरात्र 14 को। जबकि विजयादशमी यानी दशहरा 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यहां आप जानेंगे नवरात्रि अष्टमी की पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और कन्या पूजन के बारे में।

नवरात्रि अष्टमी तिथि का महत्व: नवरात्रि अष्टमी को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां अंबे के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है। इस दिन कई लोग अपने घरों में हवन करते हैं। कहते हैं माता के इस स्वरूप की पूजा से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन कई जगह शस्त्र पूजन भी किया जाता है। महाष्टमी के दिन मां दुर्गा का षोडशोपचार पूजन किया जाता है। कई लोग इस तिथि को कुमारी पूजा भी करते हैं।

नवरात्रि के आठवें दिन ऐसे करें मां महागौरी की अराधना: अष्टमी को महागौरी देवी को नारियल का भोग जरूर लगाएं। संभव हो तो इस दिन गुलाबी रंग के वस्त्र पहनकर मां की पूजा करें। ज्योतिष अनुसार मां महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। ऐसे में इनकी पूजा से राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। कहते हैं नवरात्रि के आठवें दिन यदि सुहागिन महिलाएं माता को चुनरी अर्पित करती हैं तो उनके सुहाग की उम्र लंबी बनी रहती है। इसके पूजन से अटके हुए काम बनने लगते हैं।

मां महागौरी के मंत्र:

-ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

-प्रार्थना मंत्र

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

-स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

कन्या पूजन अष्टमी 2021 मुहूर्त

नवरात्रि अष्टमी शुभ मुहूर्त: अमृत काल- 03:23 AM से 04:56 AM तक और ब्रह्म मुहूर्त– 04:41 AM से 05:31 AM तक है।

दिन का चौघड़िया मुहूर्त :

लाभ – 06:26 AM से 07:53 PM

अमृत – 07:53 AM से 09:20 PM

शुभ – 10:46 AM से 12:13 PM

लाभ – 16:32 AM से 17:59 PM

कैसे करें कन्या पूजन:

कन्या पूजन कोई घर पर तो कोई मंदिर में जाकर करता है।

शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को कंजक पूजा के लिए आमंत्रित करना चाहिए।

कन्या पूजन में एक बालक का होना भी जरूरी माना जाता है।

कन्या पूजन वाले दिन सबसे पहले माता अम्बे की विधि विधान पूजा कर लें।

इसके बाद कन्याओं और बालक के साफ जल से पैर धोएं।

फिर कन्याओं और बालक को विराजने के लिए आसन दें।

फिर मां दुर्गा के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और सभी कन्याओं और एक बालक को तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें।

इसके बाद बालक और कन्याओं को भोजन परोसें।

भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।

फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें सम्मान के साथ विदा करें।

मां महागौरी की आरती:

जय महागौरी जगत की माया ।

जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा ।

महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे

जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता

कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥

सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया

उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥

बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया

शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता

माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥

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