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इस सप्ताह है रक्षा बंधन, राखी बांधने का मुहूर्त

इस सप्ताह है रक्षा बंधन, राखी बांधने का मुहूर्त
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पंडित चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री ।कानपुर। ज्योतिष विशारद

पंचांग के अनुसार 22 अगस्त 2021, रविवार को रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है. इस दिन सावन मास का समापन होगा और 23 अगस्त 2021 से भाद्रपद मास का आरंभ होगा.

रक्षा बंधन का पर्व सावन मास का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना गया है. रक्षा बंधन पर बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं. इस पर्व को बहुत ही पवित्र माना जाता है. राखी को रक्षा सूत्र भी कहते हैं. रक्षा बंधन पर बहने भाई की आरती उतार कर तिलक करती हैं और रक्षा का वचन लेती हैं. ये पवित्र पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक भी है. रक्षा बंधन का पर्व संपूर्ण भारत में मनाया जाता है.

22 अगस्त 2021, पंचांग

रक्षा बंधन का पर्व इस वर्ष शुभ संयोग में मनाया जाएगा. इस बार रक्षा बंधन पर शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है. पंचांग के अनुसार विशेष शुभ मुहूर्त का योग बना हुआ है. पूर्णिमा की तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का शुभ योग बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में योग को शुभ योग माना गया है.

राखी बांधने का मुहूर्त

रक्षाबंधन पर प्रात: 06 बजकर 15 मिनट से प्रात: 10 बजकर 34 मिनट तके तक शोभन योग रहेगा,, 22 अगस्त 2021 को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट दोपहर से शाम 04 बजकर 18मिनट तक,,अभिजीत मुहूर्त=11बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक,, राखी बांधना सबसे शुभ मुहूर्त है

।।भद्रा और राहुकाल का बचाव कर।। 22 को भद्रा सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक है अतः इसके बाद ही रक्षाबंधन का पर्व मनाये ।। राहु काल शाम 5।बजे से6।30 तक है इस समय काल मे रक्षाबंधन का पर्व ना मनाये

।। रक्षाबंधन को बांधते वक्त इस मंत्र का जाप करें ।।

येन बद्धो बलि: राजा दानवेंद्रो महाबल।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र के शाब्दिक अर्थ में बहन रक्षासूत्र बांधते वक्त कहती है कि जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षे (राखी) तुम अडिग रहना। अपने रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित मत होना। इसी कामना के साथ बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है ।

।। देवी लक्ष्मी और राजा बलि की कथा ।।

कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार के रूप में राक्षस राज बलि से तीन पग में उनका सार राज्य मांग लिया था और उन्हें पाताल लोक में निवास करने को कहा था। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने मेहमान के रूप में पाताल लोक चलने को कहा। जिसे विष्णु जी मना नहीं कर सके। लेकिन जब लंबे समय से विष्णु भगवान अपने धाम नहीं लौटे तो लक्ष्मी जी को चिंता होने लगी। तब नारद मुनी ने उन्हें राजा बलि को अपना भाई बनाने की सलाह दी और उनसे उपहार में विष्णु जी को मांगने को कहा। मां लक्ष्मी ने ऐसा ही किया और इस संबंध को प्रगाढ़ बनाते हुए उन्होंने राजा बलि के हाथ पर राखी या रक्षा सूत्र बांधा।

।।भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा ।।

महाभारत में प्रसंग आता है जब राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया तो उनका हाथ भी इसमें घायल हो गया। उसी क्षण द्रौपदी ने अपने साड़ी का एक सिरा कृष्ण जी की चोट पर बांधा दिया। भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को इसके बदले रक्षा का वचन दिया। इसीके परिणाम स्वरूप जब हस्तिनापुर की सभा में दुस्शासन द्रौपदी का चीर हरण कर रहा था तब भगवान कृष्ण ने उनका चीर बढ़ा कर द्रौपदी के मान की रक्षा की।

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