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लोहिया की धारा के विवेकवान वैचारिक अनुयायी भगवती सिंह

लोहिया की धारा के विवेकवान वैचारिक अनुयायी भगवती सिंह
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देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी आंदोलन में डॉ लोहिया के सहयोगी के रूप में बाबू भगवती सिंह 1952 के आम चुनाव से लेकर पिछले विधानसभा चुनाव तक लगातार सोशलिस्ट धारा के प्रति समर्पित रहे।

राज्यसभा सांसद,विधायक,मंत्री के रूप में पिछले पैसठ सालों से उनका राजनैतिक और सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा।सोशलिस्ट पार्टी के लखनऊ पान दरीबा स्थित कार्यालय के लम्बे समय तक संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।समाजवादी पार्टी के वे संस्थापक सदस्य थे।

राजनीति की फिसलन भरी राहों पर पूरी गरिमा के साथ शिखर पर रहते हुए भी मन,वचन,कर्म से उनका समाजवादी व्यवहार स्थिर बना रहा।

बाबू जी भगवती सिंह जी के साथ उनकी पत्नी स्मृतिशेष शांति देवी भी समाजवादी आंदोलन की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती थी।

1955 में जब तत्कालीन कांग्रेसी सरकार ने महिलाओं के प्रयोग से जुड़ी वस्तुओं पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान किया,उसके विरोध में शांतिदेवीजी, प्रभाजी सहित तीन अन्य महिलाओं ने गिरफ्तारी देते हुए जेल गयीं।

1956-57 में जब लोहिया,जनेश्वर के साथ भगवती सिंह लखनऊ जेल में सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करते हुए जेल में बंद कर दिए गए।उस समय जेल में सभी समाजवादियों के लिए भोजन अपने हाथों से बनाकर माता जी शांति देवी ही स्वयं ले जाती थी।

भगवती बाबू जी का पूरा जीवन समाजवादी आदर्शो को अमलीजामा पहनाने में समर्पित रहा।आदरणीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव के साथ वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से जुड़े रहे।

समाजवादी आंदोलन के यशस्वी नेता श्री अखिलेश यादव जी उनके समाजवादी विचारपरम्परा के योगदान का सदैव सम्मान करते थे।

उनके साथ की अनेक स्मृतियाँ मन मष्तिष्क में सहज ही जीवंत हो गयी।

2007-10 जब मेरे राजनैतिक गुरु बृजभूषण तिवारी राज्यसभा सदस्य थे उस दौरान भगवती बाबू जी दिल्ली के लुटियंस में पंडित पंत मार्ग पर ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में ही रहते थे।दिल्ली के अनेक आयोजनों और सदन की कार्यवाही के दौरान उनका स्नेह मिलता रहता था।

2011 में लखनऊ स्थित लोहिया जन्म शताब्दी समारोह में मेरे द्वारा संपादित पुस्तक लोहिया और युवजन के विमोचन कार्यक्रम में मंच पर उनकी उपस्थिति थी।

2016 में समाजवादी मॉडल के युवा ध्वजवाहक अखिलेश और छोटे लोहिया जनेश्वर पुस्तक के विमोचन में भी उनका स्नेह मिला।मेरे लेखन और वैचारिक कार्यो को वे सदैव प्रोत्साहित करते रहे।उनके अभिन्न राजनैतिक साथी आदरणीय माता प्रसाद पांडेय जी के आवास पर पिछली बार उनसे सार्थक मुलाकात हुई थी।जिसमें समाजवादी आंदोलन के कई अनकहे किस्से शामिल थे।मेरे राजनैतिक अभिभावक आदरणीय राजेंद्र चौधरी जी का भी उनसे पिछले चार दशकों से उनका आत्मीय जुड़ाव था।दो वर्ष पूर्व समाजवादी अध्ययन केंद्र सिद्धार्थनगर द्वारा उनके समृद्ध एवं विशिष्ट राजनैतिक जीवन के महत्व को देखते हुए भगवती बाबू के रिवरबैंक कॉलोनी स्थित आवास जाकर सम्मानित किया गया था।

उनका जाना समाजवादी आंदोलन के लिए अपूर्णीय क्षति है।लोहिया के बाद की पीढ़ी के समाजवादी नेताओं में उनका अहम स्थान था।उनका जीवन संघर्ष और प्रतिबद्धता हमारे लिए प्रेरणादायक है।

मणेन्द्र मिश्रा मशाल

यश भारती विभूषित

संस्थापक- समाजवादी अध्ययन केंद्र

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