अब UPI पेमेंट में होगा 1 घंटे का 'ब्रेक', RBI ला रहा किल स्विच जैसे 5 बड़े सेफ्टी फीचर्स

Update: 2026-04-10 07:55 GMT

देश में ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ जबरदस्त स्टेप्स उठाए हैं, जिन्हें 5-पॉइंट सेफ्टी प्लान कहा जा रहा है. हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्तावित हैं, लागू नहीं हुए हैं. इस प्लान में किल स्विच से लेकर पेमेंट होने में एक घंटे वाली देरी शामिल है. चलिए इस खबर में आपको बताते हैं कि वो 5 धमाकेदार नियम क्या हैं और इनका आम नागरिक पर क्या असर पड़ सकता है.

क्यों पड़ी इन नियमों की जरूरत?

पहले ये जानिए कि इन नियमों को क्यों लाया जा रहा है. दरअसल नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में 28 लाख डिजिटल फ्रॉड हुए थे. आम नागरिक के बैंक खातों से 22,931 रुपये की चोरी कर ली गई थी. गौर करने वाली बात ये है कि 98 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इसमें 10 हजार से ऊपर की रकम का था. इसलिए रिजर्व बैंक अब डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसकी सेफ्टी पर भी खास फोकस कर रहा है.

क्या हैं 5 मास्टर प्लान?

अगर यूजर्स को लगता है कि उसके साथ कुछ धोखाधड़ी हुई है या हो सकती है तो वो सिंगल क्लिक से अपने सभी अकाउंट्स के डिजिटल पेमेंट मोड्स को फौरन बंद कर सकता है. इसे किल स्विच कहा जा सकता है. यानी एक ही क्लिक पर यूपीआई, नेट बैंकिंग और कार्ड्स की सेफ्टी आप कर सकते हैं.10 हजार से ऊपर के अमाउंट पर अब एक घंटे का वेटिंग पीरियड रहेगा. मान लीजिए आपने 12 हजार का पेमेंट किया तो बैलेंस आपके अकाउंट से कट हो जाएगा, पर पैसा एक घंट तक आपके बैंक के पास ही रहेगा. इस दौरान अगर आपको लगता है कि ये गलती से या फिर किसी फ्रॉड की वजह से पेमेंट हुआ है तो आप इसकी जानकारी अपने बैंक को दे सकते हैं. ऐसा करने पर ट्रांजैक्शन कैंसिल हो जाएगा.70 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को ठगी से बचाने के लिए आरबीआई ने ट्रस्टेड पर्सन का कॉन्सेप्ट सामने रखा है. यानी बड़े ट्रांजैक्शंस के लिए इन ग्राहकों को अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से ऑथेंटिकेशन या वेरिफिकेशन कराना जरूरी हो सकता है. इससे सोशल इंजीनियरिंग के जरिए होने वाली ठगी पर रोक लगेगी.ठग अक्सर दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खातों यानी म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं. अब रिजर्व बैंक हर साल की क्रेडिट लिमिट फिक्स करने पर विचार कर रहा है. अगर किसी खाते में अचानक तय सीमा से ज्यादा पैसा आता है, तो उसे शैडो क्रेडिट में रखा जाएगा. यानी पैसा खाते में तो दिखेगा लेकिन ग्राहक उसे तब तक निकाल नहीं पाएगा जब तक वह बैंक को पैसे का सही सोर्स ना बता दे.सिर्फ OTP अब काफी नहीं होगा. आरबीआई ने सुझाव दिया है कि हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस के लिए बायोमेट्रिक्स, पिन या सेफ्टी टोकन जैसे लेयर्स जरूरी किए जाएं. सिस्टम ये भी देखेगा कि लेनदेन किसी नए डिवाइस से हो रहा है या पुराने भरोसेमंद डिवाइस से.

क्या होगा आम नागरिक पर असर?

आरबीआई के इस कदम से डिजिटल पेमेंट की इंस्टेंट वाली सुविधा थोड़ी धीमी जरूर होगी, लेकिन सेफ्टी का लेवल कई गुना बढ़ जाएगा. आरबीआई ने इन प्रस्तावों पर 8 मई 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं. इसके बाद जल्द ही नई गाइडलाइंस लागू की जा सकती हैं.

Similar News