पुष्पवर्षा से महकी गलियां, जयकारों से गूंजा शहर—भगवान महावीर स्वामी जयंती भव्यता और आध्यात्मिकता के चरम पर

Update: 2026-03-30 06:39 GMT

आनन्द गुप्ता /अनवार खाँ मोनू

बहराइच। महावीर जयंती के पावन अवसर पर आज सुबह से ही बहराइच आध्यात्मिक उल्लास, भक्ति और संस्कारों की उज्ज्वल आभा में डूबा रहा। नगर की हवा में अहिंसा, शांति और करुणा का संदेश मानो जीवन्त हो उठा। जैन समाज द्वारा आयोजित महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव इस बार श्रद्धा, अनुशासन और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम बन गया।

शहर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में मंगल ध्वनियों के बीच पूजा-अर्चना के पश्चात भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान महावीर स्वामी की आकर्षक झांकी, सुसज्जित रथ, मंत्रोच्चार करते बच्चे, पारंपरिक परिधान में सजे श्रद्धालु—मानो पूरा शहर आध्यात्मिक रंगों में रंग गया।

शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ी तो गलियों में पुष्पवर्षा का दृश्य मोहक बन गया। जगह-जगह श्रद्धालु आरती-पूजन कर स्वागत करते दिखे। बैंड-बाजों की मधुर धुनें, ध्वज-पताकाओं की छटा और जयकारों की गूंज ने पूरे शहर को एक दिव्य उत्सव के वातावरण में बदल दिया।

बैंड की ताल पर बढ़ते कदमों के बीच हर किसी के हृदय में एक ही संदेश स्पंदित हो रहा था—

“अहिंसा परमो धर्मः।”

यात्रा के दौरान भगवान महावीर के उपदेश—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और तप—को सुंदर झांकियों और स्लोगनों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

इसी दौरान नगर की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर प्रदीप सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ पूरे मार्ग पर सक्रिय और मुस्तैद रहे। उनके समन्वय और निगरानी के कारण शोभायात्रा निर्बाध, शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से सम्पन्न हुई।

समापन पर शोभायात्रा पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहाँ विशेष अभिषेक, पूजा, आरती, प्रवचन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। उपस्थित लोगों ने प्रसादी ग्रहण कर इस आध्यात्मिक उत्सव को पूर्णता प्रदान की।

जैन समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में शांति, सत्य और सद्भाव के मूल्यों को स्थापित करने का संदेशवाहक पर्व है।

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