माकपा की 'जन आक्रोश रैली' में उमड़ा जनसैलाब ; मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान

Update: 2026-03-25 05:19 GMT


(संजय पराते की रिपोर्ट)

नयी दिल्ली, 25 मार्च। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के विरोध में कल मंगलवार को रामलीला मैदान में एक विशाल 'जनाक्रोश' रैली का आयोजन किया, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों ने हिस्सा लिया।

इस रैली में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर हिंदी भाषी राज्यों से आए हजारों खेत मजदूरों, किसानों और मजदूरों ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी और नए श्रम कानूनों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। रैली में छत्तीसगढ़ से भी हजारों लोगों ने भाग लिया

इस असवर पर माकपा महासचिव एम. ए. बेबी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीला मैदान में उमड़ा यह विशाल जनसैलाब मेहनतकश जनता के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है। उन्होंने रैली की सफलता के लिए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए आह्वान किया कि आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और अधिक व्यापक और तेज करें। माकपा नेता ने कहा कि लाल झंडा कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जिसे मिटाया जा सके ; यह लोगों के संघर्षों का प्रतीक है। जहाँ भी लोग खड़े होंगे, लाल झंडा बुलंद होगा। बेबी ने कहा, "हमारा काम सिर्फ़ भाषण देने तक ही सीमित नहीं है। हम मज़दूरों, किसानों, खेतिहर मज़दूरों, छात्रों, महिलाओं, युवाओं, दलितों और पिछड़े समुदायों से जुड़ते हैं। हम उनकी चिंताओं को सुनते हैं।"

रैली में दूसरे वक्ताओं ने रसोई गैस की कमी, कमरतोड़ महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत सरकार साम्राज्यवादी अमेरिका के दबाव में झुक रही है, जिससे देश के हितों को नुकसान पहुँच रहा है। इस अवसर पर अमेरिका इजरायल धुरी द्वारा ईरान के खिलाफ पर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें साम्राज्यवादी ताकतों की आक्रामक नीतियों की कड़ी निंदा की गई।

रैली को पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड तपन सेन, विजू कृष्णन, अमरा राम, अशोक धवले और मरियम धवले सहित केंद्रीय कमेटी के कई दिग्गज नेताओं ने संबोधित किया। नेताओं ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

यह रैली पूरे भारत में पार्टी के व्यापक जनसंपर्क अभियान के समापन का भी अवसर थी। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों में 33 जन आक्रोश जत्थों के समापन के अवसर पर यह रैली आयोजित की गयी थी।

माकपा ने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) से जुड़ी अधिसूचना को वापस लेने और हाल ही में लागू किए गए 'विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम' को रद्द करने की माँग की है। जनाक्रोश रैली में कहा गया कि बिजली अधिनियम में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए और डिस्कॉम का निजीकरण नहीं होना चाहिए। माकपा ने बीज विधेयक में संशोधन का भी विरोध किया।

रैली की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभिन्न राज्यों से कार्यकर्ता और समर्थक दो दिन पहले ही दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए थे। मंगलवार सुबह तक पूरा रामलीला मैदान लाल झंडों और सरकार विरोधी नारों से पट गया था।

माकपा ने स्पष्ट किया है कि यह रैली केवल एक पड़ाव है और मजदूरों-किसानों की यह एकजुटता भविष्य में और बड़े आंदोलनों का रूप लेगी।

(रिपोर्टर छत्तीसगढ़ माकपा के राज्य सचिवमंडल के सदस्य हैं।

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