वरुथिनी एकादशी व्रत आज : शुभ योग में श्रीहरि की आराधना, पापों से मुक्ति और समृद्धि की कामना

Update: 2026-04-13 04:17 GMT

साभार : विजय तिवारी

धर्म संवाद।

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पावन वरुथिनी एकादशी आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है और इसे कष्टों से मुक्ति, पापों के क्षय तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, “वरुथिनी” का अर्थ होता है रक्षा करने वाली। इसी कारण यह एकादशी व्रत साधक के जीवन में आने वाली बाधाओं, नकारात्मक प्रभावों और दुर्भाग्य से संरक्षण प्रदान करने वाला माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक उन्नति मिलती है, बल्कि उसके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता भी बढ़ती है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत—

मनुष्य के संचित पापों का क्षय करता है

जीवन में आने वाले कष्ट, संकट और बाधाओं को कम करता है

आयु, यश, सुख और समृद्धि में वृद्धि का कारण बनता है

साधक को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है

धर्माचार्यों का कहना है कि यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो अपने जीवन में नकारात्मक परिस्थितियों से निकलकर नई दिशा और संतुलन की तलाश में हैं।

देशभर के मंदिरों और घरों में श्रद्धालु प्रातःकाल से ही व्रत और पूजन में जुटे हुए हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जाता है

श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं—कुछ निर्जला, तो कुछ फलाहार के साथ व्रत का पालन करते हैं

संध्या समय व्रत कथा श्रवण और आरती के साथ पूजन सम्पन्न होता है

विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन सात्विक आचरण, संयम और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।

इस वर्ष वरुथिनी एकादशी का संयोग शुभ योग में पड़ने से इसकी आध्यात्मिक महत्ता और अधिक बढ़ गई है। ज्योतिषीय दृष्टि से ऐसे योग में किया गया व्रत और पूजन अधिक फलदायी और प्रभावशाली माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने पर वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और कथा आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालु सुबह से ही भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

वरुथिनी एकादशी का यह पावन अवसर केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में संयम, श्रद्धा और सकारात्मक कर्मों के महत्व को भी रेखांकित करता है।

यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, अनुशासन और सत्कर्मों के माध्यम से ही जीवन में स्थायी सुख और संतुलन प्राप्त किया जा सकता है।

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