शीतला अष्टमी- बसोड़ा पर्व: जिस दिन नहीं जलेगा चूल्हा, लोग खाएंगे बासी भोजन
हर साल होली के आठवें दिन बसोड़ा पूजा का त्योहार मनाया जाता है। जिसे शीतला अष्टमी और बसोदा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस पर्व में माता शीतला की पूजा होती है और उन्हें बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। कुछ लोग ये पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को भी मनाते हैं जिसे शीतला सप्तमी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इस पर्व को मनाने से माता शीतला की विशेष कृपा प्राप्त होती है जिससे घर-परिवार के सदस्यों की चेचक, खसरा इत्यादि बीमारियों से सुरक्षा होती है। चलिए आपको बताते हैं बसोड़ा पर्व पर घरों में चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता है।
मार्च में मनाया जाएगा बसोड़ा पर्व
मार्च में बसोड़ा पर्व 11 तारीख को मनाया जाएगा तो वहीं कुछ लोग 10 मार्च को भी ये पर्व मनाएंगे। दरअसल कोई शीतला सप्तमी पर ये पर्व मनाता है तो कोई शीतला अष्टमी पर। तो वहीं कुछ लोग इसे होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या शुक्रवार को भी मनाते हैं। शीतला सप्तमी 10 मार्च की है और अष्टमी 11 मार्च की है।
बसोड़ा पर चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता है?
कई ऐसे परिवार हैं जहां बसोड़ा पर्व वाले दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है और लोग इस दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। दरअसल ये परंपरा माता शीतला को शीतलता और आरोग्य समर्पित करने के लिए निभाई जाती है। पौराणिक कथा अनुसार जब शीतला माता धरती पर आई थीं तब उनके ऊपर किसी ने चावलों का पानी डाल दिया था जिससे उनके शरीर पर फफोले पड़ गए थे। इससे माता का शरीर खूब जल रहा था। तब एक महिला ने माता के शरीर पर खूब ठंडा पानी डाला जिससे माता को तुरंत राहत मिल गई। कहते हैं तभी से शीतला माता को ठंडी चीजें पसंद है और चूल्हा जलाने से गर्मी उत्पन्न होती है जो शीतला माता को पसंद नहीं है। इसी वजह से बसोड़ा पूजा पर घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
बसोड़ा पर बासी भोजन क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं अनुसार माता शीतला को शीतलता की देवी माना जाता है, जिन्हें ठंडा भोजन पसंद आता है। यही कारण है कि बसोड़ा पूजा के दिन माता को ठंडे भोजन यानी बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इस दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाने का एक कारण ये भी है कि जब माता शीतला अपने शरीर की जलन से राहत पाने के लिए एक कुम्हारन के घर पहुंची थीं। तब उसने माता को रात का बासी खाना, दही और ठंडी राबड़ी खिलाई थी जिससे माता को ठंडक मिली और उनके शरीर की जलन दूर हो गई थी। इसलिए ही इस दिन माता को एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। कहा जाता है कि जो लोग इस दिन अपने घर में चूल्हा नहीं जलाते और बासी भोजन खाते हैं उनके घर में दरिद्रता नहीं आती और चेचक जैसे रोगों का खतरा भी नहीं रहता है।