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पाकिस्तान-अफगान सीमा पर तनाव : जवाबी कार्रवाई में 270 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे जाने का दावा

पाकिस्तान-अफगान सीमा पर तनाव : जवाबी कार्रवाई में 270 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे जाने का दावा
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में अब तक 270 से अधिक तालिबान शासन से जुड़े लड़ाके और आतंकी मारे जाने का दावा किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।

सीमा के कई इलाकों में गोलीबारी

पाकिस्तानी सेना के अनुसार हालिया घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब अफगान तालिबान के लड़ाकों ने पाकिस्तान-अफगान सीमा के विभिन्न क्षेत्रों में गोलीबारी की।

DG ISPR के मुताबिक सीमा के 15 सेक्टरों में 53 अलग-अलग स्थानों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों ने इन हमलों को प्रभावी ढंग से विफल कर दिया।

रिपोर्टों के अनुसार यह गोलीबारी मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के सीमावर्ती जिलों चित्राल, खैबर, मोहम्मंद, कुर्रम और बाजौर में दर्ज की गई।

पाकिस्तान की जवाबी सैन्य कार्रवाई

स्थिति के जवाब में पाकिस्तान ने 21 और 22 फरवरी की रात अफगानिस्तान के भीतर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई शुरू की।

पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा कंधार, काबुल और पक्तिया सहित कुछ क्षेत्रों में कथित सैन्य ठिकानों और आतंकियों के अड्डों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।

पाकिस्तानी सेना के अनुसार इस कार्रवाई में:

274 तालिबान लड़ाके और संबद्ध आतंकी मारे जाने का दावा किया गया

400 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई

तालिबान शासन के 70 से अधिक सैन्य पोस्ट नष्ट किए जाने का दावा

18 चौकियों को पाकिस्तान के नियंत्रण में लेने की जानकारी दी गई है।

सैन्य ढांचे को नुकसान का दावा

DG ISPR के मुताबिक इस कार्रवाई में विरोधी पक्ष के 115 टैंक और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट किए जाने का दावा किया गया है। इसके साथ ही कथित आतंकी संगठनों Fitna-al-Hindustan और Fitna-al-Khawarij के 22 ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात भी कही गई है।

पाकिस्तानी सेना का कहना है कि जवाबी कार्रवाई के बाद कई लड़ाके अपने साथियों के शव छोड़कर क्षेत्र से भाग गए।

पाकिस्तान को भी नुकसान

पाकिस्तानी सेना ने स्वीकार किया है कि इस संघर्ष में 12 सैनिकों की मौत हुई, जबकि 27 अन्य सैनिक घायल हुए हैं।

सेना के अनुसार यह कार्रवाई देश की सुरक्षा और सीमा की रक्षा के उद्देश्य से की गई तथा इसमें मुख्य रूप से सैन्य लक्ष्यों को ही निशाना बनाया गया।

ड्रोन हमलों की कोशिश नाकाम

पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक संघर्ष के दौरान आतंकियों की ओर से एबटाबाद और नौशेरा क्षेत्रों में छोटे ड्रोन से हमले की कोशिश की गई, जिन्हें सुरक्षा बलों ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया।

सरकार का सख्त रुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निर्देश पर चलाया जा रहा सैन्य अभियान “ऑपरेशन ग़ज़ब-उल-हक़” जारी है। सेना का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इसके निर्धारित उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते।

वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सीमा पर स्थिति गंभीर है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

बातचीत की संभावना

इस बीच अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि काबुल इस विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से करना चाहता है और दोनों देशों के बीच संवाद की आवश्यकता है।

क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता

तनाव बढ़ने के बीच चीन, ईरान और मलेशिया सहित कुछ देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान-अफगान सीमा पर यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।

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