ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले से पलटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो तेहरान ने उड़ाया मजाक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अगले 5 दिनों तक उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के प्लान को टाल दिया है.शनिवार को ट्रंप ने ही घोषणा की थी कि अगर 48 घंटे में होर्मुज को ईरान ने नहीं खोला तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों पर हमला कर देगा. इससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी. आज ट्रंप की दी हुई मोहलत खत्म हो रही थी. ऐसे में ट्रंप की इस नई घोषणा ने दुनिया को राहत दी है. मगर ईरान ने इसका मजाक उड़ा दिया है.
क्यों ट्रंप ने ये फैसला लिया
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में हमारी शत्रुता के पूर्ण और समग्र समाधान के संबंध में बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत की है। इन गहन, विस्तृत और रचनात्मक वार्ताओं के स्वरूप और लहजे को देखते हुए, जो पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि ईरानी ऊर्जा संयंत्रों और ऊर्जा अवसंरचनाओं पर सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाए, बशर्ते कि चल रही बैठकों और चर्चाओं का परिणाम सकारात्मक रहे। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"
🚨 #BREAKING
— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) March 23, 2026
Trump, fearing Iran's response, backed down from his 48-hour ultimatum:
'I told the Department of Defense not to carry out any attacks on Iran's energy infrastructure for the time being' https://t.co/XIGrdtIPKE
ईरान ने ट्रंप का क्या मजाक उड़ाया
ईरान की सरकारी मीडिया ने ट्रंप के इस ऐलान का तत्काल मजाक उड़ाते हुए जवाब दिया कि एक बार ट्रंप पीछे हट गए. IRIB ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा, 'ईरान की प्रतिक्रिया के डर से ट्रंप ने अपना 48 घंटे का अल्टीमेटम वापस ले लिया: 'मैंने रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि फिलहाल ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कोई हमला न करें.'
अभी कुछ दिनों पहले भी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मौजूदा युद्ध पर अमेरिकी सरकार के बयानों के लहजे की तुलना वियतनाम युद्ध के दौरान दी गई अति आशावादी सैन्य ब्रीफिंग से की है. उनका कहना है कि वाशिंगटन उसी तरह के दावे दोहरा रहा है, जो बाद में जमीनी हकीकत से बेतुके साबित हुए. उन्होंने कई उदाहरण भी गिनाए. यहां क्लिक कर जानिए कैसे उदाहरण दिए थे.
जंग का नुकसान
ईरान ने अमेरिका की धमकी के बाद खाड़ी देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी की चेतावनी दी थी. अब ट्रंप की नई घोषणा से ईरान भी शायद ऐसा नहीं करे. जंग शुरू होने के बाद से ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि मरने वालों की संख्या 1,500 से अधिक हो गई है. इजरायल में ईरानी हमलों में 15 लोग मारे गए हैं. वेस्ट बैंक और खाड़ी अरब देशों में कम से कम 13 अमेरिकी सैन्यकर्मी और एक दर्जन से अधिक नागरिक मारे गए हैं. यही नहीं जंग शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुईं हैं. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 113 डॉलर प्रति बैरल थी, जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 55% बढ़ी है. वहीं अमेरिका के भी 13 सैनिकों की मौत अब तक इस जंग में हुई हैं. वहीं इजरायल में ईरान के मिसाइल हमलों से कई लोगों के घायल होने की खबर है.




