#IndiaAIImpactSummit2026 : “दुनिया को संदेश — भारत तकनीक और निवेश के लिए तैयार” | प्रियांका चतुर्वेदी का बड़ा बयान, इंडिया-फर्स्ट AI मॉडल पर जोर

रिपोर्ट विजय तिवारी
नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस पांच दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में सरकार, उद्योग जगत, स्टार्टअप, शोध संस्थान, अकादमिक विशेषज्ञ और कई देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे हैं। समिट का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल तकनीकी चर्चा तक सीमित न रखकर उसे विकास, रोजगार, गवर्नेंस और सामाजिक बदलाव से जोड़ना बताया जा रहा है।
भारत को ग्लोबल AI हब बनाने की रणनीति
समिट में AI को भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव मानते हुए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सुरक्षा, जिम्मेदार तकनीक और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। नीति-निर्माताओं का मानना है कि भारत की भाषाई विविधता, विशाल डेटा और तेजी से बढ़ता डिजिटल यूजर बेस उसे वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में नई ताकत दे सकता है।
सम्मेलन में शिक्षा, हेल्थकेयर, कृषि, फिनटेक और स्मार्ट गवर्नेंस से जुड़े कई AI समाधान पेश किए गए, जिन्हें आम लोगों के जीवन को आसान बनाने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।
प्रियांका चतुर्वेदी का बयान — ‘इंडिया-फर्स्ट AI मॉडल ही भविष्य’
शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियांका चतुर्वेदी ने समिट को तकनीक और इनोवेशन के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि यह दुनिया को संदेश देता है कि भारत “ओपन फॉर बिज़नेस” है और नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा,
“यह देश के लिए एक अहम समिट है। मैं आईटी और कम्युनिकेशन की स्टैंडिंग कमेटी का हिस्सा हूं और AI पर राउंड टेबल चर्चाओं में भाग ले रही हूं। AI तकनीक टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, गवर्नेंस और वेलफेयर योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी भूमिका निभा सकती है।”
उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि भारत को अपने AI मॉडल विकसित करने चाहिए, जो भारत की जरूरतों के अनुसार समाधान दें।
“हमारे मॉडल इंडिया-स्पेसिफिक होने चाहिए और भारतीय उद्यमियों को इंडिया-फर्स्ट समाधान बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, तभी यह ज्यादा प्रभावशाली होगा।”
सरकार का फोकस — जिम्मेदार और समावेशी AI
समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और जिम्मेदार, समावेशी तथा मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर जोर दिया। इस आयोजन को तीन प्रमुख सूत्रों — पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस — के आधार पर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य तकनीक को विकास और समाज से जोड़ना है।
सरकार की ओर से हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, GPU क्षमता बढ़ाने और AI रिसर्च को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई, ताकि भारत में बड़े स्तर पर AI मॉडल तैयार किए जा सकें।
स्टार्टअप, निवेश और नवाचार का विस्तार
समिट में भारतीय स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई कंपनियों ने भाषा आधारित AI मॉडल, हेल्थ-AI प्लेटफॉर्म, कृषि समाधान और स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी जैसे प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI सेक्टर में बड़े निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की युवा प्रतिभा, डिजिटल बाजार और डेटा संसाधन उसे AI इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं।
नीति, सुरक्षा और नैतिकता पर भी चर्चा
समिट के दौरान AI गवर्नेंस, डेटा प्राइवेसी, डीपफेक, साइबर सुरक्षा और नैतिक मानकों पर भी गहन बहस हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ मजबूत नियामक ढांचा और जिम्मेदार उपयोग जरूरी है, ताकि तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके।
क्यों अहम है इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026?
ग्लोबल साउथ में आयोजित यह पहला बड़ा वैश्विक AI सम्मेलन माना जा रहा है।
20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और सैकड़ों वैश्विक AI विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं।
सरकार, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है।
इंडियाAI मिशन और डिजिटल इंडिया पहल के तहत विकास आधारित AI समाधान पर जोर दिया गया है।
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम बनने जा रहा है। प्रियांका चतुर्वेदी के ‘इंडिया-फर्स्ट AI मॉडल’ वाले बयान से लेकर सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश योजनाओं तक — यह समिट भारत को वैश्विक AI नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच बनता नजर आ रहा है।




