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नेपाल में सियासी भूचाल : जनरेशन-Z आंदोलन केस में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

नेपाल में सियासी भूचाल : जनरेशन-Z आंदोलन केस में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

नेपाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे देश की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। नई सरकार के गठन के बाद जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त कदम उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli और पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। यह कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए जनरेशन-Z छात्र आंदोलन के दौरान हुई मौतों से जुड़े मामले में जांच आयोग की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की गई बताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद नेपाल की राजनीति में माहौल गरमा गया है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

बताया जाता है कि सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं और छात्रों का बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था, जिसे जनरेशन-Z आंदोलन कहा गया। यह आंदोलन शुरुआत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों के विरोध से शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह देशव्यापी आंदोलन बन गया। काठमांडू सहित कई प्रमुख शहरों में बड़ी संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए थे। आंदोलन के दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और हालात तनावपूर्ण हो गए।

8 सितंबर 2025 को काठमांडू और अन्य शहरों में प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। आरोप लगे कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसमें कथित तौर पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर भी गोलीबारी हुई। इन घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, केवल एक दिन की झड़पों में कई लोगों की जान गई, जबकि पूरे आंदोलन के दौरान मृतकों की संख्या कई दर्जन तक पहुंचने की बात कही गई। इन घटनाओं के बाद पूरे नेपाल में राजनीतिक संकट गहरा गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार पर भारी दबाव पड़ा था, जिसके बाद उनकी सरकार गिर गई और उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

घटना के बाद मामले की जांच के लिए सरकार द्वारा एक जांच आयोग गठित किया गया था। यह आयोग पूर्व विशेष न्यायालय की न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में बनाया गया था। जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में उस समय की सरकार, गृह मंत्रालय और पुलिस नेतृत्व की भूमिका की जांच की और कई अधिकारियों तथा राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की। आयोग की रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग की भूमिका पर सवाल उठाए गए और उन्हें मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि इन सभी के खिलाफ नेपाल की राष्ट्रीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या से जुड़े मामले दर्ज किए जाएं। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर लंबी सजा का प्रावधान भी बताया गया है। इसी रिपोर्ट और गृह मंत्रालय की औपचारिक शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री Balen Shah ने पद संभालते ही पहली कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें जांच आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा की गई। कैबिनेट में निर्णय लिया गया कि आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा और जिन लोगों पर जिम्मेदारी तय की गई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद नेपाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हिरासत में लिया और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया गया।

सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक प्रतिशोध के तहत नहीं, बल्कि जांच आयोग की रिपोर्ट, कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से की गई है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जांच में पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल या सेना के अधिकारियों की भूमिका भी दोषी पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका की विस्तृत जांच के लिए अलग से जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के बाद नेपाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों और ओली समर्थकों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी नागरिक की मौत, विशेष रूप से आंदोलन के दौरान हुई मौतों के मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होना जरूरी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण घटना है। इससे यह संकेत मिला है कि नई सरकार जवाबदेही और कानून के आधार पर फैसले लेने का संदेश देना चाहती है। आने वाले समय में इस मामले की जांच, अदालत की सुनवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं नेपाल की राजनीति की दिशा पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। यह मामला नेपाल की संसद से लेकर सड़कों तक लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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