भारत में V2V टेक्नोलॉजी की बड़ी तैयारी : अब गाड़ियां करेंगी आपस में संवाद, हादसे से पहले मिलेगा सटीक अलर्ट

रिपोर्ट : विजय तिवारी
नई दिल्ली।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक अत्याधुनिक और भविष्य की तकनीक व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में सीधे संवाद कर सकेंगे और संभावित खतरे की स्थिति बनने से पहले ही ड्राइवर को चेतावनी मिल जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि हादसों की संख्या में बड़ी कमी लाई जाए और सड़क यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाया जाए।
क्या है V2V टेक्नोलॉजी और क्यों है यह खास?
V2V टेक्नोलॉजी ऐसी स्मार्ट प्रणाली है, जिसमें वाहन बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के एक-दूसरे से वायरलेस सिग्नल के माध्यम से जुड़ते हैं। यह सिस्टम वाहन की गति, दिशा, ब्रेकिंग और दूरी जैसी अहम जानकारियां आसपास मौजूद अन्य गाड़ियों के साथ साझा करता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ड्राइवर को खतरे की जानकारी आंखों से देखने से पहले ही मिल जाती है, जिससे वह समय रहते निर्णय ले सकता है।
V2V सिस्टम कैसे करेगा काम?
हर वाहन में एक विशेष कम्युनिकेशन डिवाइस लगाया जाएगा, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए काम करेगा।
यह डिवाइस आसपास चल रही या सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से लगातार डेटा का आदान-प्रदान करेगा।
जैसे ही किसी वाहन के अचानक ब्रेक लगाने, तेज रफ्तार से पास आने या टक्कर की आशंका बनेगी, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा।
अलर्ट साउंड, डिस्प्ले या वाइब्रेशन के जरिए ड्राइवर तक पहुंचेगा, जिससे प्रतिक्रिया का समय बढ़ जाएगा।
किन हालात में साबित होगी सबसे ज्यादा कारगर?
V2V टेक्नोलॉजी उन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी मानी जा रही है, जहां मानवीय गलती या दृश्यता की कमी के कारण हादसे होते हैं—
घने कोहरे में, जब सामने की गाड़ी नजर नहीं आती
हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रैफिक के दौरान
सड़क किनारे खड़े वाहनों से पीछे से टकराने की घटनाओं में
अचानक ब्रेक या लेन बदलने की स्थिति में
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से रिएक्शन टाइम बढ़ेगा और गंभीर दुर्घटनाओं में बड़ी कमी आ सकती है।
सरकार और मंत्री का क्या कहना है?
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस तकनीक को सड़क सुरक्षा के लिए एक “गेम चेंजर” बताया है। उन्होंने कहा है कि कोहरा, तेज रफ्तार और सड़क पर खड़े वाहन अक्सर बड़े हादसों की वजह बनते हैं। V2V टेक्नोलॉजी ड्राइवर को पहले ही सतर्क कर देगी, जिससे दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।
इसके साथ ही बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन वाहनों में भी अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स जोड़े जाने की योजना है।
कब से लागू होगी V2V टेक्नोलॉजी?
परिवहन मंत्रालय की योजना के अनुसार—
V2V तकनीक को 2026 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
शुरुआती चरण में यह सुविधा नई गाड़ियों में अनिवार्य रूप से दी जाएगी।
बाद के चरणों में पुराने वाहनों के लिए भी इसे वैकल्पिक या अनिवार्य बनाने पर विचार होगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
भविष्य की स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था की ओर कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि V2V टेक्नोलॉजी न केवल सड़क हादसों को कम करेगी, बल्कि यह स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और भविष्य की ऑटोमेटेड व सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों की नींव भी मजबूत करेगी। यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक लागू होती है, तो भारत सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर सकता है।




