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दिल्ली में रणनीतिक डिप्लोमेसी का पावर शो : 3 घंटे की वार्ता में भारत–यूएई के बीच ऊर्जा, रक्षा और निवेश पर बड़े फैसले

दिल्ली में रणनीतिक डिप्लोमेसी का पावर शो : 3 घंटे की वार्ता में भारत–यूएई के बीच ऊर्जा, रक्षा और निवेश पर बड़े फैसले
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच दिल्ली में हुई लगभग तीन घंटे की उच्चस्तरीय और गहन वार्ता ने भारत–यूएई द्विपक्षीय संबंधों को एक नई रणनीतिक दिशा दी। इस दौरे को कूटनीतिक दृष्टि से “पावर पैक विज़िट” माना जा रहा है, क्योंकि सीमित समय में ठोस समझौते, अहम नीतिगत सहमतियाँ और दूरगामी घोषणाएँ सामने आईं।

वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत–यूएई रिश्ते अब केवल व्यापार या ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, तकनीक, निवेश, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हुए एक बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।

ऊर्जा सुरक्षा : दीर्घकालिक भरोसे का आधार

ऊर्जा सहयोग इस बैठक का सबसे अहम स्तंभ रहा। यूएई भारत का प्रमुख और भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति समझौतों के जरिए भारत को वैश्विक भू-राजनीतिक और बाजार अस्थिरताओं के बीच स्थिर, सुरक्षित और अनुमानित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया।

इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ईंधन और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। यह भारत के ऊर्जा संक्रमण, कार्बन न्यूट्रल लक्ष्यों और दीर्घकालिक विकास रणनीति के अनुरूप माना जा रहा है।

रक्षा और रणनीतिक सहयोग : सुरक्षा साझेदारी को मजबूती

रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने पर दोनों देशों ने साझा सहमति जताई। इसमें

रक्षा प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास

रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग

समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा

आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने के लिए समन्वय

जैसे बिंदु शामिल हैं। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों को लेकर साझा दृष्टिकोण पर भी चर्चा हुई, जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निवेश और आर्थिक साझेदारी : विकास का इंजन

यूएई की ओर से भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, डिजिटल इकॉनमी, स्टार्टअप और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के संकेत मिले। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दीर्घकालिक और संस्थागत रूप से मजबूत करने पर सहमति जताई।

इससे भारत में पूंजी प्रवाह बढ़ने, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, तकनीकी उन्नयन और निर्यात को नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अंतरिक्ष और उन्नत तकनीक : भविष्य की साझेदारी

अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह सेवाओं और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इनोवेशन, उन्नत अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों में साझेदारी को विस्तार देने का निर्णय लिया गया। यह सहयोग भारत की तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक तकनीकी उपस्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग : किसानों को लाभ

खाद्य सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।

भारत के कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए यूएई को एक बड़े और स्थिर बाजार के रूप में विकसित करना

फूड प्रोसेसिंग, भंडारण और सप्लाई चेन में निवेश

किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को प्रत्यक्ष लाभ

इन सभी पहलुओं पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया, जिससे भारत के कृषि निर्यात को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प

वार्ता के दौरान आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई। दोनों देशों ने आतंकवाद के वित्तपोषण, नेटवर्क और चरमपंथ के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने, खुफिया जानकारी साझा करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया। इसे क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम कदम माना जा रहा है।

यूएई राष्ट्रपति का यह दिल्ली दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक बैठक नहीं रहा, बल्कि भारत–यूएई रणनीतिक साझेदारी को ठोस आधार देने वाला निर्णायक पड़ाव साबित हुआ है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, निवेश, तकनीक, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में हुई सहमतियाँ भारत के दीर्घकालिक आर्थिक और राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़ी हैं।

यूएई का भारत का भरोसेमंद ऊर्जा और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरना दोनों देशों के बीच गहराते विश्वास, साझा हितों और भविष्य की संयुक्त दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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