सुधारों की रफ्तार से दौड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था, 2025-26 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान

रिपोर्ट : विजय तिवारी
नई दिल्ली।
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। ताज़ा आर्थिक अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। इस अनुमान के सामने आते ही नरेंद्र मोदी ने सरकार की आर्थिक नीतियों और बीते वर्षों में किए गए सुधारों पर भरोसा जताया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था “सुधार एक्सप्रेस की तेज रफ्तार” से आगे बढ़ रही है और इसका असर अब आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने इस विकास दर को सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों और नीतिगत फैसलों का परिणाम बताया।
सुधारों की बुनियाद पर मजबूत होती ग्रोथ
प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं—
कर प्रणाली में सुधार, जिससे टैक्स अनुपालन बढ़ा
GST व्यवस्था के स्थिरीकरण से कारोबार को राहत
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश, सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों का विस्तार
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
डिजिटल इंडिया, यूपीआई और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार
स्टार्टअप और MSME सेक्टर को नीतिगत समर्थन
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से न सिर्फ आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी भारत पर मजबूत हुआ है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूती
दुनिया के कई देश जहां मंदी, युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत लगातार उच्च विकास दर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, युवा आबादी और नीतिगत स्थिरता भारत की बड़ी ताकत है।
आम जनता तक GDP ग्रोथ का असर
7.4% की अनुमानित GDP वृद्धि का असर यदि जमीनी स्तर तक पहुंचता है, तो इसके कई सकारात्मक परिणाम हो सकते हैं—
रोजगार के नए अवसर, खासकर निर्माण, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में
सरकारी योजनाओं के लिए ज्यादा संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर खर्च बढ़ेगा
निजी निवेश में तेजी, जिससे उद्योगों का विस्तार होगा
राज्यों को अधिक राजस्व, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी
हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि GDP ग्रोथ का असली फायदा तभी आम लोगों को मिलेगा जब महंगाई नियंत्रण में रहे, आय बढ़े और जीवनयापन की लागत संतुलित रहे।
सरकार की आगे की रणनीति
सरकार का फोकस आने वाले समय में—
निर्यात बढ़ाने
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने
ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन
युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और रोजगार
पर रहने वाला है, ताकि विकास दर टिकाऊ बनी रहे।
2025-26 के लिए 7.4% GDP ग्रोथ का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि सुधारों की दिशा में उठाए गए कदम असर दिखा रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इस आर्थिक प्रगति का लाभ आम नागरिक, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग तक समान रूप से पहुंचे।




