ईरान पर हमले के लिए भारतीय बंदरगाहों के इस्तेमाल का दावा खारिज, विदेश मंत्रालय ने बताया ‘झूठा’

रिपोर्ट : विजय तिवारी
नई दिल्ली।
भारत सरकार ने उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए भारतीय बंदरगाहों या नौसैनिक सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को बेबुनियाद, भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी बंदरगाह या सैन्य अड्डे का उपयोग इस तरह के किसी ऑपरेशन में नहीं किया जा रहा है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी डगलस मैकग्रेगर ने एक अमेरिकी मीडिया नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना को भारत के बंदरगाहों और नौसैनिक सुविधाओं पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस विषय को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं, जिसके बाद भारत सरकार को आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 4, 2026
Claims being made on OAN, a US based channel that Indian ports are being used by the US Navy are fake and false. We caution you against such baseless and fabricated comments. pic.twitter.com/xiFWnkoXBk
क्या था अमेरिकी पूर्व अधिकारी का दावा
अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे संघर्ष और सैन्य तनाव के कारण अमेरिका की कुछ सैन्य सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में अमेरिकी नौसेना को वैकल्पिक बंदरगाह सुविधाओं की आवश्यकता पड़ रही है और इसी कारण भारत जैसे देशों के बंदरगाहों का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में सैन्य ढांचे को नुकसान होने के कारण अमेरिका को अपने सैन्य संचालन के लिए अन्य देशों की सुविधाओं का उपयोग करना पड़ सकता है। हालांकि उनके इस बयान को लेकर अमेरिकी सरकार या अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विदेश मंत्रालय ने दावे को बताया ‘फर्जी’
भारत के विदेश मंत्रालय ने इन दावों का स्पष्ट और सख्त खंडन किया है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत हैं।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट जारी कर कहा कि कुछ मीडिया मंचों पर किए जा रहे दावे फेक और फॉल्स हैं। मंत्रालय ने लोगों को ऐसी भ्रामक और अपुष्ट जानकारी से सावधान रहने की सलाह दी है।
सरकार ने साफ तौर पर कहा कि भारत के किसी भी बंदरगाह, नौसैनिक अड्डे या सैन्य सुविधा का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान के लिए नहीं किया जा रहा है।
भारत की विदेश नीति और सैन्य सहयोग
भारत की विदेश नीति लंबे समय से रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलित कूटनीति पर आधारित रही है। भारत कई देशों के साथ रक्षा सहयोग और नौसैनिक अभ्यास करता है, लेकिन किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए अपने सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति देने जैसी खबरों को लेकर सरकार बेहद सतर्क रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें अक्सर अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय तेजी से फैलती हैं, इसलिए सरकार ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करना जरूरी समझा।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आई प्रतिक्रिया
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व क्षेत्र में कई घटनाओं के कारण तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान से जुड़ी घटनाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
ऐसे माहौल में विभिन्न देशों की सैन्य गतिविधियों और संभावित गठबंधनों को लेकर कई तरह की अटकलें भी सामने आती रहती हैं। भारत सरकार ने इस मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान का समर्थक है।
भारत की अपील : संयम और संवाद जरूरी
भारत ने मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
सरकार का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष को बढ़ने से रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ने एक बार फिर यह भी दोहराया कि विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।
अफवाहों से सावधान रहने की सलाह
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल मंचों पर बिना पुष्टि के कई तरह की खबरें तेजी से फैल जाती हैं। इसलिए लोगों को किसी भी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर केवल आधिकारिक स्रोतों और प्रमाणित जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत के बंदरगाहों के उपयोग को लेकर फैल रही खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और जनता को ऐसी अफवाहों से दूर रहने की जरूरत है।




