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संसद में राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान, रिकॉर्ड से आपत्तिजनक शब्द हटाए गए

संसद में राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान, रिकॉर्ड से आपत्तिजनक शब्द हटाए गए
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली |

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में प्रयुक्त कुछ शब्दों को लोकसभा की आधिकारिक कार्यवाही से हटा दिया गया।

रिकॉर्ड से क्या हटाया गया

संसदीय प्रक्रिया के तहत आपत्तिजनक/असंसदीय माने गए शब्दों—जिनमें “भागने/escape” जैसे संदर्भ शामिल बताए गए—को एक्सपंज (रिकॉर्ड से विलोपित) किया गया। नियमों के अनुसार, बिना ठोस साक्ष्य या मर्यादित भाषा के अनुरूप न होने वाले कथनों को अध्यक्ष/स्पीकर द्वारा हटाया जा सकता है।

विपक्ष का पक्ष

विपक्षी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, शासन और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए थे। उनका तर्क है कि प्रश्न पूछना और जवाब मांगना संसदीय लोकतंत्र का मूल तत्व है। विपक्ष का यह भी कहना है कि शब्द हटाए जाने के बावजूद मुद्दों की प्रासंगिकता बनी रहती है और उन पर चर्चा होनी चाहिए।

सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया

सत्तापक्ष ने जोर दिया कि संसदीय मर्यादा और नियम सर्वोपरि हैं। उनके अनुसार, व्यक्तिगत आरोप, असंसदीय भाषा या बिना प्रमाण के दावे सदन की गरिमा के विपरीत हैं। इसलिए रिकॉर्ड से शब्द हटाना नियमसम्मत कार्रवाई है। सत्तापक्ष ने यह भी कहा कि नीतिगत बहस का स्वागत है, लेकिन भाषा और प्रक्रिया की सीमाएं तय हैं।

अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटनाक्रम पर अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर देने की बात कही, जबकि कुछ ने नियमों के पालन पर जोर दिया। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों के चलते बहस और तेज हुई है।

संसदीय प्रक्रिया क्या कहती है

लोकसभा के नियमों के अनुसार, यदि अध्यक्ष/स्पीकर यह पाते हैं कि किसी सदस्य का कथन असंसदीय, मानहानिकारक या नियमों के विरुद्ध है, तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। ऐसे मामलों में भाषण का शेष हिस्सा कार्यवाही में बना रहता है, लेकिन विवादित शब्द आधिकारिक अभिलेख का हिस्सा नहीं होते।

राजनीतिक असर और आगे की राह

रिकॉर्ड से शब्द हटाए जाने के बाद संसद के भीतर कार्यवाही को लेकर तीखी बहस और बाहर राजनीतिक बयानबाजी देखी जा रही है। समर्थक इसे जवाबदेही की मांग बताते हैं, जबकि विरोधी इसे मर्यादा उल्लंघन का मामला मानते हैं। आने वाले सत्रों में इस विषय पर और चर्चा व स्पष्टीकरण की संभावना जताई जा रही है।

राहुल गांधी के भाषण से जुड़े कुछ शब्दों का रिकॉर्ड से हटाया जाना संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इससे जुड़े नीतिगत प्रश्न और राजनीतिक मतभेद अभी भी बहस के केंद्र में हैं। यह प्रकरण संसदीय भाषा, नियमों और जवाबदेही पर चल रही व्यापक चर्चा को एक बार फिर सामने लाता है।

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