गैर-प्रमुख बंदरगाहों को विकास की मुख्यधारा में लाने की कवायद, नीति आयोग ने राज्यों और केंद्र के साथ की विस्तृत समीक्षा बैठक

रिपोर्ट : विजय तिवारी
देश की समुद्री अवसंरचना (Maritime Infrastructure) को सशक्त बनाने और गैर-प्रमुख (Non-Major) बंदरगाहों की भूमिका को राष्ट्रीय विकास में और प्रभावी करने के उद्देश्य से नीति आयोग (NITI Aayog) ने नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में राज्य समुद्री बोर्डों, बंदरगाह संचालकों, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
नीति आयोग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य गैर-प्रमुख बंदरगाहों के सामने मौजूद संरचनात्मक, परिचालन और नीतिगत चुनौतियों की पहचान करना और उन्हें दूर करने के लिए दीर्घकालिक सुधारों पर चर्चा करना था। इन बंदरगाहों को देश के पोर्ट-आधारित विकास मॉडल में अधिक प्रभावी भूमिका देने पर व्यापक मंथन हुआ।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर फोकस
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि गैर-प्रमुख बंदरगाहों के विकास के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, गहरे ड्राफ्ट, बेहतर कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों से मजबूत जुड़ाव से न केवल माल ढुलाई की लागत घटेगी, बल्कि व्यापार की गति भी बढ़ेगी।
डिजिटलाइजेशन से बढ़ेगी दक्षता
परामर्श के दौरान बंदरगाह संचालन में डिजिटल तकनीक और स्मार्ट सिस्टम को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। डिजिटलीकरण के जरिए
क्लीयरेंस प्रक्रिया को सरल बनाना,
जहाजों के ठहराव समय को कम करना,
रियल-टाइम डेटा के आधार पर निर्णय लेना
जैसे कदमों को गैर-प्रमुख बंदरगाहों की परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए अहम माना गया।
निवेश और निजी भागीदारी पर चर्चा
बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि गैर-प्रमुख बंदरगाहों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश अनुकूल नीतियां, नियामक सुधार और सुशासन आवश्यक हैं। निजी निवेश को आकर्षित करने, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा देने और परियोजनाओं की समयबद्ध मंजूरी पर भी चर्चा हुई।
नियमन और शासन सुधार की जरूरत
नीति आयोग ने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न राज्यों में बंदरगाहों से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना जरूरी है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बंदरगाहों के विकास में तेजी आएगी। बेहतर शासन ढांचे से गैर-प्रमुख बंदरगाहों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलेगी।
केंद्र–राज्य समन्वय को मिलेगी मजबूती
बैठक के दौरान विभिन्न हितधारकों के बीच अनुभवों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे भविष्य की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। नीति आयोग ने इसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अधिकांश कार्गो हैंडलिंग और क्षेत्रीय व्यापार में गैर-प्रमुख बंदरगाहों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नीति आयोग की यह पहल संकेत देती है कि सरकार इन बंदरगाहों को स्थानीय विकास, रोजगार सृजन और लॉजिस्टिक्स सुधार का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।
नीति आयोग की यह परामर्श बैठक गैर-प्रमुख बंदरगाहों को देश की समुद्री अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे न केवल बंदरगाहों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।




