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NEET PG माइनस 40 स्कोर पर एडमिशन से डॉक्टरों की योग्यता पर नहीं पड़ेगा असर… केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब किया दाखिल

NEET PG माइनस 40 स्कोर पर एडमिशन से डॉक्टरों की योग्यता पर नहीं पड़ेगा असर… केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब किया दाखिल
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नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस (NEET) PG 2025 में माइनस 40 स्कोर तक हासिल करने वाले कैंडिडेट्स को भी मेडिकल के पीजी कोर्सों में एडमिशन देने संबंधी नियम के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा है कि इस नियम से मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन देने पर डॉक्टर्स की योग्यता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. केंद्र सरकार ने शीर्ष कोर्ट से कहा है कि नीट पीजी न्यूनतम योग्यता को प्रमाणित नहीं करता है. यह मेडिकल की सीमित पीजी सीटों के आवंटन के लिए केवल एक छंटाई तंत्र है. न्यूनतम योग्यता MBBS से स्थापित की जाती है.

आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में क्या कहा है? जानेंगे कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की इस फैसले संबंधी चिंताओं पर क्या जवाब दिया है.

NEET PG की कटऑफ में कमी, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

असल में राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड ने 13 जनवरी, 2026 को नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए नीट पीजी 2025 की कटऑफ में कमी कर दी थी. इस फैसले के तहत सामान्य वर्ग के लिए नीटी पीजी की कटऑफ कम करते हुए 7 पर्सेंटाइल और SC, ST, OBC के लिए 0 कर दी थी. इस फैसले के बाद NEET PG 2025 में माइनस 40 स्कोर हासिल करने वाले SC, ST, OBC कैंडिडेट्स भी मेडिकल की PG सीटों में एडमिशन के लिए एलिजिबिल हो गए थे, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था.

केंद्र सरकार ने दायर हलफनामे में क्या-क्या कहा?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जवाब तलब करने के बाद केंद्र सरकार ने हलफनाम दाखिल किया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि NEET PG स्कोर सापेक्ष प्रदर्शन और परीक्षा संरचना पर निर्भर करते हैं, जिन्हें नैदानिक ​​अक्षमता का निर्धारक नहीं माना जा सकता है. साथ ही केंद्र ने कहा है कि इससे डॉक्टर्स की योग्यताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

मरीजों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर?

मरीजों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि मेडिकल पीजी ट्रेनिंग के दौरान कैंडिडेट्स सीनियर फैकेल्टी और एक्सपर्ट की निरंतर देखरेख में काम करते हैं और अंतिम योग्यता का मूल्यांकन एमडी/एमएस परीक्षाओं के माध्यम से किया जाता है.

हलफनामे में केंद्र सरकार ने निवेदन किया गया है कि मरीजों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं निराधार हैं. मेडिकल पीजी कोर्स में एडमिशन पाने वाले सभी कैंडिडेट्स पहले से ही लाइसेंस प्राप्त MBBS डॉक्टर्स हैं. MBBS डॉक्टर होने के नाते, उन्हें स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का अधिकार है.

परीक्षाओं के बाद योग्यताओं का मूल्यांकन

केंद्र सरकार ने दाखिल जवाब में कहा है कि मेडिकल की पीजी एजुकेशन 3 साल का एक ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसमें अंतिम योग्यता का मूल्यांकन एमडी/एमएस परीक्षाओं के माध्यम से किया जाता है, जिसमें कैंडिडेट्स को प्रमाणन के समय मानक को बनाए रखने के लिए बिना किसी छूट के सैद्धांतिक और व्यावहारिक परीक्षाओं में अलग-अलग कम से कम 50% अंक प्राप्त करने होंगे.

कटऑफ में कमी के फैसले से 1 लाख कैंडिडेट्स को फायदा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल पीजी की संभावित रिक्त सीटों की बड़ी संख्या को देखते हुए नीट पीजी की कट-ऑफ कम करने का निर्णय लिया है. हलफनामे में कहा गया है कि इस निर्णय से तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए अतिरिक्त 1,00,054 उम्मीदवार पात्र हो जाएंगे, जिससे कुल पात्र उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 2,28,170 हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये पहली बार नहीं हो रहा

वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार नहींं हो रहा है.जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा तो यह सिर्फ इसी साल नहीं हो रहा है, यह 2023 से हो रहा है. वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सरकारी संस्थानों में फीस 9000 से 27000 के बीच है, जबकि निजी संस्थानों में यह 95 लाख से 1.5 करोड़ तक है.शंकरनारायणन ने कहा कि नीट पीजी की 50वें परसेंटाइल तक 1.3 लाख उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें कट-ऑफ कम करना पड़ता है क्योंकि फीस इतनी अधिक है कि वे छात्र निजी संस्थानों में प्रवेश नहीं ले सकते. नियामक होने के नाते, उन्हें फीस पर कुछ सीमा लगाने पर विचार करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर सभी याचिकाओं को टैग किया है. वहीं मामले में अगली सुनवाई 24 मार्च के लिए तय कर दी गई है.

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