IPS सुशील अग्रवाल : कर्तव्यनिष्ठ पुलिसिंग की मिसाल, 240 सोने के सिक्कों के जटिल मामले से बनी अलग पहचान

रिपोर्ट : विजय तिवारी
वडोदरा।
गुजरात कैडर के 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी सुशील अग्रवाल इन दिनों अपने कार्यशैली, प्रशासनिक पकड़ और जमीनी स्तर पर सक्रिय पुलिसिंग को लेकर चर्चा में हैं। आईआईटी दिल्ली से बी.टेक करने के बाद यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में आए सुशील अग्रवाल वर्तमान में वडोदरा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
वडोदरा ग्रामीण क्षेत्र भौगोलिक रूप से बड़ा और संवेदनशील माना जाता है। यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण और ग्रामीण इलाकों में पुलिस व्यवस्था को प्रभावी रखना एक बड़ी चुनौती होती है। सुशील अग्रवाल के कार्यकाल में क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता, त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है।
बड़े आयोजनों में सुरक्षा प्रबंधन
हाल के समय में वडोदरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले और महिला प्रीमियर लीग जैसे बड़े खेल आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में रही। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई रणनीति के कारण आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वे केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर के सुरक्षा प्रबंधन में भी दक्ष अधिकारी हैं।
240 सोने के सिक्कों का मामला : जांच की मिसाल
सुशील अग्रवाल को व्यापक पहचान वर्ष 2023 में नवसारी में एसपी रहते हुए सामने आए एक बेहद जटिल मामले से मिली। यह मामला ब्रिटिश काल के 240 सोने के सिक्कों की बरामदगी से जुड़ा था। एक मकान के नवीनीकरण के दौरान दीवार से बड़ी संख्या में सोने के सिक्के निकलने के बाद मामला उलझ गया। काम कर रहे मजदूर सिक्कों को लेकर दूसरे राज्य चले गए और घटनाक्रम ने कई कानूनी व प्रशासनिक मोड़ ले लिए।
इस प्रकरण में स्थिति इतनी जटिल हो गई कि कुछ पुलिसकर्मियों को भी संदेह के घेरे में आना पड़ा और उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में सुशील अग्रवाल ने मामले की पूरी जांच दोबारा शुरू कराई। उन्होंने तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की बारीकी से समीक्षा करवाई और क्राइम ब्रांच की टीमों को दूसरे राज्य भेजकर हर पहलू की गहन पड़ताल कराई।
लंबी और विस्तृत जांच के बाद न केवल पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आई, बल्कि सभी 240 सोने के सिक्के भी सुरक्षित रूप से बरामद किए गए। बरामदगी के बाद सिक्कों को नियमानुसार न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिससे मामले को कानूनी रूप से सही दिशा मिली।
निष्पक्षता और पेशेवर दृष्टिकोण
सुशील अग्रवाल की कार्यशैली की खास बात यह मानी जाती है कि वे किसी भी मामले में जल्दबाजी या दबाव में निर्णय नहीं लेते। वे जांच को तथ्यों और सबूतों पर आधारित रखते हैं और ज़रूरत पड़ने पर स्वयं फील्ड में जाकर स्थिति का आकलन करते हैं। यही कारण है कि उनके द्वारा देखे गए मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को विशेष महत्व मिला है।
उपलब्ध तथ्यों और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आईपीएस सुशील अग्रवाल ने कानून-व्यवस्था, अपराध जांच और सार्वजनिक सुरक्षा—तीनों क्षेत्रों में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद अधिकारी के रूप में अपनी पहचान स्थापित की




