योगी जी का UP इन्वेस्टमेंट प्लान हवा-हवाई, महाराष्ट्र और कर्नाटक बने निवेशकों की पहली पसंद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और रोजगार देने के दावों के बावजूद, राज्य में विदेशी निवेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रवीण पाठक ने इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ाने के ठोस प्रयास किए जाएं ताकि यहां के युवाओं को रोजगार मिल सके।
महाराष्ट्र और कर्नाटक ने किया निवेश आकर्षित
देश के कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का 50% से अधिक हिस्सा अक्टूबर 2019 से सितंबर 2024 के बीच केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक ने हासिल किया। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र ने $82,638 मिलियन (कुल निवेश का 31%) और कर्नाटक ने $54,574 मिलियन (कुल निवेश का 21%) विदेशी निवेश आकर्षित किया।
गुजरात और दिल्ली भी आगे
गुजरात और दिल्ली क्रमश: 16% और 13% के साथ निवेश आकर्षित करने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल रहे, जबकि तमिलनाडु ने 5% निवेश हासिल किया।
उत्तर प्रदेश की स्थिति कमजोर
जहां अन्य राज्यों ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपनी नीतियों और आधारभूत ढांचे में सुधार किया, वहीं उत्तर प्रदेश इस दौड़ में काफी पीछे रह गया। राज्य को निवेश में पिछड़ने के कारण रोजगार के अवसरों की भारी कमी झेलनी पड़ रही है।
आंकड़े बताते हैं सच्चाई
देश के शीर्ष 10 राज्यों में झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल ने केवल 1% निवेश प्राप्त किया, और उत्तर प्रदेश इन राज्यों के साथ निचले पायदान पर है।
प्रवीण पाठक का सरकार से सवाल
प्रवीण पाठक ने कहा, "जब महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं, तो उत्तर प्रदेश क्यों नहीं? सरकार को सिर्फ घोषणाएं करने के बजाय निवेश के अनुकूल माहौल बनाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।"
सरकार को अब यह समझना होगा कि केवल वादों से जनता को गुमराह करना संभव नहीं है। अगर निवेश लाने और रोजगार सृजन के लिए नीतियों में सुधार नहीं किया गया, तो राज्य के विकास का सपना अधूरा रह जाएगा।




