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जिस देश में गिरफ्तार हुआ PNB घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी, उससे भारत के कैसे हैं रिश्ते, प्रत्यर्पण आसानी से क्या हो पाएगा

जिस देश में गिरफ्तार हुआ PNB घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी, उससे भारत के कैसे हैं रिश्ते, प्रत्यर्पण आसानी से क्या हो पाएगा
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दिल्ली से करीब 6 हजार किलोमीटर दूर देश है – बेल्जियम. यूरोप का छोटा सा देश. जिसकी सीमाएं जर्मनी, फ्रांस जैसे ताकतवर देशों के साथ लगती हैं. इसी बेल्जियम की पुलिस ने भारत के भगोड़े और डायमंड कारोबारी मेहुल चौकसी को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी 12 अप्रैल – शनिवार को हुई. मेहुल चौकसी की उम्र 65 साल है. भारत के बड़े सरकारी बैंकों में से एक पंजाब नेशनल बैंक में हुए करीब साढ़े 13 हजार करोड़ रुपये के कर्ज की धोखाधड़ी के मामले में भारत को उसकी तलाश है. साल 2018 ही से वो भारत की जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा है.

मार्च 2023 में इंटरपोल ने चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को वापस ले लिया था. इसके बाद ही से भारत की जांच एजेंसियां – ईडी और सीबीआई, उसे बेल्जियम से भारत प्रत्यर्पित करने के लिए प्रयास कर रही हैं. इस साल की शुरुआत में बेल्जियम ने भारत सरकार को ये बताया था कि चोकसी और उसकी पत्नी एंटीगुआ से अब बेल्जियम आकर रहने लगे हैं. चोकसी की गिरफ्तारी के बाद सवाल उठ रहा है कि चोकसी क्या जल्द ही भारत लाया जा सकेगा. ये सवाल इसलिए भी क्योंकि अभी हाल ही में तहव्वुर हुसैन राणा को लंबे प्रयासों के बाद अमेरिका से भारत लाया गया.

दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच साल 1997 ही से एक प्रत्यर्पण संधि था. पर बेल्जियम के मामले में क्या. क्या वहां से चोकसी को आसानी से भारत लाया जा सकेगा.

भारत-बेल्जियम के बीच संधि

दरअसल, मार्च 2020 में भारत और बेल्जियम के बीच प्रत्यर्पण संधि पर मुहर लगी. दोनों देशों के बीच करार हुआ कि अगर प्रत्यर्पण से संबंधी किसी अपराध में शामिल रहा आरोपी या दोषी, अगर एक दूसरे के देश में गिरफ्तार होता है, तो उसका प्रत्यर्पण होगा. अब सवाल है कि वो कौन से अपराध होंगे जिनको प्रत्यर्पण के लायक माना जाएगा. तो इसका जवाब है कि ऐसे अपराध जो दोनों देशों के कानूनों में एक साल या उससे अधिक की कठोर सजा वाले होंगे.

ये प्रत्यर्पण बाध्यकारी नहीं है

भारत और बेल्जियम के बीच की प्रत्यर्पण संधि हत्या, बलात्कार, जालसाजी, गबन और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी को एक दूसरे को सौंपने की इजाजत देती है. हालांकि, यहीं ये बात भी है कि ये प्रत्यर्पण उस देश के विवेक पर निर्भर करेगा. मतलब ये कि ये बाध्यकारी नहीं है. ये इस पर भी निर्भर करेगा कि बेल्जियम में भी वो मामला अपराध बनता है या नहीं. साथ ही, भारत को उसकी गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण और मुकदमे को जायज ठहराना होगा.

इस राह में हैं कई मुश्किलें

इस मामले में व्हिसल-ब्लोअर हरिप्रसाद एसवी ने कहा कि प्रत्यर्पण इतना आसान नहीं होगा. क्योंकि जब डोमिनिका में चोकसी गिरफ्तार हुआ था तो वो प्रत्यर्पण से बच निकला था. कहा जा रहा है कि भारत को उसके प्रत्यर्पण के लिए काफी काबिल वकील करना होगा. क्योंकि वो अपनी तरफ से पहले भी जबरदस्त वकील के साथ मुकदमा लड़ता रहा है. इसे लेकर विजय माल्या का भी उदाहरण दिया जा रहा है, जो अच्छे वकील, दलीलों की बदौलत अब तक अपने प्रत्यर्पण से बचा हुआ है.

क्या है ये पीएनबी का मामला

हरि प्रसाद ही ने जुलाई 26, 2016 को प्रधानमंत्री कार्यालय को एक चिठ्ठी लिककर पीएनबी में चल रहे बड़े पैमाने पर घोटाले का पर्दाफाश किया था. मेहुल चोकसी खुदरा ज्वेलरी कंपनी गीताजंली ग्रुप का मालिक है. वह एक हीरा कारोबारी है. मेहुल चोकसी के अलावा उसका भतीजा नीरव मोदी भी इस मामले में आरोपी है. ये सारा घोटाला मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच से जुड़ा है. इस घोटाले में नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, परिवार के सदस्य, कर्मचारी और बैंक अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी मुकदमा दायर कर चुकी है.

इन लोगों पर बैंक को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं. अब तक ईडी इस मामले में चोकसी के खिलाफ तीन चार्जशीट दाखिल कर चुका है. मेहलु चोकसी बेल्जियम में शरण लेने से पहले अफ्रीकी देश एंटीगुआ और बारबुडा रह रहा था. वहीं, चोकसी का भतीजा नीरव मोदी फिलहाल लंदन जेल में बंद है. पहले ये रिपोर्ट भी आई कि मेहुल और उसकी पत्नी प्रीती चोकसी जिनेवा में बसने के बारे में सोच रहे हैं. मुंबई की एक विशेष अदालत को इस साल चोकसी के एक वकील ने बतलाया था कि वह फिलहाल बेल्जियम के शहर एंटवर्प में रह रहा है. जहां उसका ब्लड कैंसर का इलाज चर रहा है.

दो सप्ताह पहले, मेहुल चोकसी और उसकी पत्नी प्रीती को बेल्जियम का एफ-रेसिडेंसी कार्ड मिल चुका है. प्रीती बेल्जियम की नागरिक है. उसके परिवार के कई सदस्य बेल्जियम में रहते हैं.

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