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कानपुर HDFC बैंक मामला : ग्राहक-कर्मचारी विवाद में एकतरफा वीडियो वायरल, निष्पक्ष जांच की मांग

कानपुर HDFC बैंक मामला : ग्राहक-कर्मचारी विवाद में एकतरफा वीडियो वायरल, निष्पक्ष जांच की मांग
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

कानपुर | पनकी क्षेत्र – वायरल वीडियो पर स्पष्ट तथ्यात्मक स्थिति

कानपुर के पनकी इलाके में स्थित HDFC Bank की शाखा से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो बैंक की महिला कर्मचारी आस्था सिंह और एक ग्राहक के बीच हुए विवाद से संबंधित बताया जा रहा है। हालांकि, सामने आए तथ्यों के अनुसार यह वीडियो एकतरफा है, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है।

क्या दिखता है वायरल वीडियो में

वायरल क्लिप में बैंक कर्मचारी आस्था सिंह गुस्से की स्थिति में यह कहते हुए सुनाई देती हैं—

“मैं ठाकुर हूं, मुझसे बकचोदी मत करना।”

इसी बयान के आधार पर सोशल मीडिया पर उन पर जातिसूचक टिप्पणी और अभद्र भाषा के आरोप लगाए जा रहे हैं।

अधूरा वीडियो, अधूरी तस्वीर

स्थानीय जानकारी और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, वीडियो में सिर्फ एक पक्ष दिखाई दे रहा है। आरोप है कि इससे पहले संबंधित ग्राहक द्वारा बैंक कर्मचारी के साथ बदतमीजी और अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिसके बाद गुस्से में आकर आस्था सिंह ने उक्त प्रतिक्रिया दी।

ग्राहक के व्यवहार या पूरे विवाद की शुरुआत से जुड़ा कोई वीडियो फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

सोशल मीडिया पर बहस

एकतरफा वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो वहीं कई यूजर्स का कहना है कि पूरा वीडियो या दोनों पक्ष सामने आए बिना निष्कर्ष निकालना गलत है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आधिकारिक स्थिति

इस मामले में अभी तक एचडीएफसी बैंक की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। न ही यह स्पष्ट है कि बैंक प्रबंधन ने आंतरिक स्तर पर क्या कदम उठाए हैं।

वायरल वीडियो एकतरफा बताया जा रहा है

विवाद से पहले ग्राहक के व्यवहार का कोई वीडियो सामने नहीं

प्रतिक्रिया गुस्से की स्थिति में दी गई बताई जा रही है

बैंक या प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित होगा कि पूरा घटनाक्रम सामने आए बिना किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। मामले की सच्चाई बैंक के आधिकारिक बयान या निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो

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