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उत्तर प्रदेश

दिव्यास्त्र: लखनऊ के युवा इंजीनियरों का 500KM रेंज वाला घातक ड्रोन

दिव्यास्त्र: लखनऊ के युवा इंजीनियरों का 500KM रेंज वाला घातक ड्रोन
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ईरान अमेरिका युद्ध के बीच दुनियाभर के देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं. भारत में सेना के साथ-साथ कई प्राइवेट कंपनी भी कुछ नए प्रयोग करती दिखाई दे रही हैं. ऐसी ही एक कंपनी है होवरिट, जो लखनऊ में स्थित है. इस कंपनी ने 'दिव्यास्त्र' तैयार किया है. महज 24 साल के युवा और उसके साथियों के शौक ने प्रयोग के ऐसे पंख दिए कि आज उसने देश की सुरक्षा के लिए ये 'दिव्यास्त्र' तैयार कर दिया है.

500KM है इसकी रेंज

'दिव्यास्त्र' नाम का ये ड्रोन/यूएवी दुश्मन देश को परेशान करने के लिए काफी है. इसकी रेंज 500 किलोमीटर की है, वहीं पेलोड 15 किलो है. यानी आसान भाषा में ये 500 किलोमीटर दूर जाकर किसी टारगेट को 15 किलो के विस्फोटक से तहस नहस कर सकता है. ये दिव्यास्त्र 10 हजार फीट की ऊंचाई पर जाकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के जरिए दिए गए टारगेट को लोकेट कर उस पर मार करता है.

महज 24 साल की उम्र में रचा इतिहास

होवरिट के तीन फ़ाउंडर्स हैं. इनमें से पवन मात्र 24 साल के हैं. पवन बताते हैं कि उनकी कंपनी ने सबसे पहले 'बाज' नाम के एक ड्रोन तैयार किया था. बाज लगभग 10 किलोमीटर की रेंज के साथ जाकर सर्विलांस और अटैक, दोनों काम कर सकता है. इसके बाद जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ तब तीनों फ़ाउंडर्स ने दिव्यास्त्र बनाने की तैयारी शुरू की. दिव्यास्त्र के दो अलग अलग वर्जन हैं. दोनों पर लगातार काम हो रहा है.

10 हजार फीट की ऊंचाई पर भर सकता है उड़ान

दिव्यास्त्र नाम के इस ड्रोन/यूएवी को लेकर पवन बताते हैं कि 1.7 मीटर चौड़े इस ड्रोन के नोज को बदलकर इससे सर्विलांस और अटैक दोनों का काम लिया जा सकता है. दस हजार फीट की ऊंचाई पर ये लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़कर अपने टारगेट को चेज करता है. टारगेट लॉक होने के बाद ये 15 किलो विस्फोटक वाले मिसाइल को लगभग 550-600 किलोमीटर की स्पीड से मारता है.हॉवरिट के फाउंडिंग मेम्बर पवन ने दिव्यास्त्र माक-2 के बारे में बताया कि इसकी चौड़ाई 3 मीटर से ज्यादा है. ये 2000 किलोमीटर की दूरी तक जाकर मार सकता है. उसकी पेलोड भी 80 किलो तक की है. फिलहाल होवरिट नाम की इस कंपनी की कोशिश है कि वो ज्यादा पेलोड और स्पीड वाले ड्रोन्स तैयार करके भारतीय सेना को मुहैया करायें. पवन बताते हैं कि उनके ड्रोन बाज का इस्तेमाल इससे पहले डिफेंड फोर्स ने सफलतापूर्वक किया है.

पवन अपने दिव्यास्त्र की कीमत नहीं बताना चाहते. हालांकि वो कहते हैं कि मार्केट में इस तरह के ड्रोन/यूएवी की कीमत से उनके दिव्यास्त्र की कीमत एक तिहाई ही है. यानी कम लागत में ज्यादा मारक क्षमता वाला ये प्रयोग भारतीय सैन्य बलों के लिए मुनाफे का सौदा बन सकती हैं. फिलहाल होवरिट ने दिव्यास्त्र के प्रयोग किए हैं और सरकार ने उनकी काम को देखते हुए डिफेंड कॉरिडोर में 55 हजार स्क्वायर फीट की जमीन लीज पर दे दी है.

दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में बनने वाले इस तरह के ड्रोन्स/यूएवी को लेकर पवन पांडे ने कहा कि भारत की क्षमता बढ़ जरूर रही है, लेकिन प्रोडक्शन के लिहाज से ईरान जैसे देश से हम काफी पीछे हैं. पवन कहते हैं कि उनकी कंपनी फिलहाल एक महीने में 20 ड्रोन तक बनाने की क्षमता रखती है. फंड्स बेहतर मिलें तो शायद इसको काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है. पवन का मानना है कि युवाओं को डिफेंड एक्सपेरिमेंट के फील्ड में आना बेहद जरूरी है.

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