सरयू घाट पर भव्य कलश पूजन, पिपरिया में गूँजे वैदिक मंत्र 33वीं श्री चंडी महायज्ञ की शुरुआत, श्रद्धा और भक्ति का उमड़ा सैलाब

अनवार खाँ मोनू
बहराइच।जनपद के थाना खैरीघाट अंतर्गत पिपरिया स्थित श्री चंडी माता मंदिर परिसर में शनिवार को आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जब 33वीं श्री चंडी महायज्ञ का शुभारंभ वैदिक ऊर्जाओं, मंत्रध्वनियों और धार्मिक उल्लास के बीच भव्यता के साथ हुआ। सुबह-सुबह शिवपुर के बौंडी स्थित सरयू घाट पर भक्तों और आचार्यों की बड़ी मंडली पहुँचकर मां सरयू का विधिवत पूजन कर वातावरण को आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया। पंडितों की मंत्रोच्चार गूँजती ध्वनियों के बीच पवित्र जल से भरे कलशों की चमक ने पूरा घाट दिव्य आभा से आलोकित कर दिया।
इसके बाद कलश यात्रा का दृश्य अद्भुत रहा—शंखनाद, ढोल-नगाड़ों, जयकारों और भक्तिमय गीतों के बीच श्रद्धालुओं का समूह जैसे ही मंदिर परिसर में पहुँचा, पूरा वातावरण “जय माता दी” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मंगल ध्वनियों और हवन अग्नि की पवित्र लपटों के बीच महायज्ञ का शुभारंभ हुआ।
मंदिर के पीठाधीश्वर और मुख्य आयोजक पंडित मुकुंदराम मिश्र ने बताया कि इस बार का आयोजन पिछले सभी वर्षों की तुलना में अधिक भव्य और विशेष है। उन्होंने कहा कि 33 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह महायज्ञ अब क्षेत्र की पहचान बन चुका है, जहाँ दूर-दराज़ के ग्रामीण, संत, भक्त और साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
मंदिर परिसर में प्रतिदिन संत सेवा, प्रवचन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहेगा। खास आकर्षण 1 दिसंबर की शाम 6 बजे आयोजित होने वाला अखिल भारतीय कवि सम्मेलन होगा, जिसमें देश के शीर्ष व सिद्धहस्त कवि अपनी रचनाओं से श्रद्धालुओं का मन मोह लेंगे। इसके लिए तैयारियाँ युद्धस्तर पर चल रही हैं।
चार दिवसीय इस दिव्य महायज्ञ का समापन 4 दिसंबर को पूर्णाहुति, विशाल भंडारे और संत विदाई के साथ किया जाएगा। पहले ही दिन श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ देखकर यह स्पष्ट हो गया कि इस बार महायज्ञ ऐतिहासिक बनने जा रहा है।




