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कीमती धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव : दो दिन में सोना ₹31 हजार और चांदी ₹1.36 लाख सस्ती, निवेशकों की मुनाफावसूली और बढ़े मार्जिन का असर

कीमती धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव : दो दिन में सोना ₹31 हजार और चांदी ₹1.36 लाख सस्ती, निवेशकों की मुनाफावसूली और बढ़े मार्जिन का असर
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली / लखनऊ।

देश के गोल्ड और सिल्वर बाजार में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों को चौंका दिया है। लगातार दूसरे दिन कीमतों में भारी दबाव देखने को मिला। 1 फरवरी को वायदा बाजार में चांदी करीब 25 हजार रुपए यानी लगभग 9% टूटकर 2.65 लाख रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। इसी तरह सोने में भी करीब 12 हजार रुपए यानी लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई और 10 ग्राम सोना 1.38 लाख रुपए के स्तर पर आ गया।

सर्राफा बाजार बंद, पिछली गिरावट का असर कायम

आज सर्राफा बाजार बंद रहने के कारण खुदरा कारोबार में नए सौदे नहीं हुए, लेकिन इससे पहले 30 जनवरी को ही कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा चुकी थी। उस दिन चांदी करीब 40 हजार रुपए से अधिक और सोना लगभग 9,500 रुपए सस्ता हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उस समय एक किलो चांदी का भाव लगभग 3.39 लाख रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.65 लाख रुपए के आसपास दर्ज किया गया था। यही वजह है कि आज बाजार बंद होने के बावजूद कीमतों में कमजोरी की चर्चा बनी रही।

दो दिन में कितनी बड़ी गिरावट

वायदा बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दो दिनों के भीतर सोने की कीमत में कुल मिलाकर करीब 31 हजार रुपए की गिरावट आई है। 29 जनवरी को सोना करीब 1.69 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 1.38 लाख रुपए पर ट्रेड कर रहा है।

चांदी में गिरावट और भी ज्यादा तेज रही। 29 जनवरी को चांदी 4.01 लाख रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह घटकर 2.65 लाख रुपए के आसपास आ गई है। यानी महज दो दिन में चांदी करीब 1.36 लाख रुपए सस्ती हो गई।

ETF में भी भारी दबाव

कीमतों में आई इस गिरावट का असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में गोल्ड ETF करीब 8% तक टूटे, जबकि सिल्वर ETF में 15% तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर ETF में निवेश किया था, उन्हें अल्पकाल में नुकसान झेलना पड़ा।

गिरावट की प्रमुख वजहें

1. रिकॉर्ड स्तर के बाद मुनाफावसूली :

हाल के दिनों में सोना और चांदी दोनों ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए थे। ऐसे में बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए भारी बिकवाली की। इस प्रॉफिट बुकिंग ने बाजार पर तुरंत दबाव बना दिया।

2. फिजिकल डिमांड में कमजोरी :

कीमतें ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद ज्वेलरी और औद्योगिक सेक्टर से फिजिकल डिमांड कमजोर पड़ी। चांदी के औद्योगिक उपयोग को लेकर भी कुछ अनिश्चितताएं सामने आईं, जिससे कीमतों में और गिरावट आई।

मार्जिन बढ़ने से क्यों बढ़ा दबाव

कमोडिटी बाजार में सौदे करने के लिए पूरी रकम एक साथ नहीं देनी होती, बल्कि कुल कीमत का एक हिस्सा सिक्योरिटी के तौर पर जमा करना पड़ता है, जिसे मार्जिन कहा जाता है। हाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी के सौदों में मार्जिन बढ़ाया गया है।

सोने पर मार्जिन करीब 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। मार्जिन बढ़ते ही कई ट्रेडर्स से अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती है। जिनके पास तुरंत नकदी नहीं होती, उन्हें अपनी पोजिशन काटनी पड़ती है। जब बड़ी संख्या में एक साथ बिकवाली होती है, तो दाम तेजी से नीचे आ जाते हैं।

आगे बाजार की दिशा क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मार्जिन का दबाव बना रहेगा और फिजिकल डिमांड में सुधार नहीं होगा, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि में वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरें और डॉलर की चाल कीमतों की दिशा तय करेंगी।

ज्वेलरी खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें

1. सर्टिफाइड सोना ही खरीदें :

हमेशा हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड लें, जिससे शुद्धता और कैरेट की पुष्टि हो सके।

2. कीमत और वजन जरूर जांचें :

खरीद के दिन का भाव अलग-अलग भरोसेमंद स्रोतों से क्रॉस चेक करें और वजन की सही माप सुनिश्चित करें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है।

असली चांदी पहचानने के आसान तरीके

मैग्नेट टेस्ट : असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती।

आइस टेस्ट : चांदी पर रखी बर्फ असली होने पर तेजी से पिघलती है।

स्मेल टेस्ट : असली चांदी में कोई गंध नहीं होती।

कपड़ा टेस्ट : सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आए तो चांदी असली मानी जाती है।

सूत्रों के अनुसार हालिया गिरावट प्रॉफिट बुकिंग, कमजोर मांग और मार्जिन बढ़ोतरी का नतीजा है। निवेशकों के लिए यह दौर सतर्कता बरतने और बाजार संकेतों पर करीबी नजर रखने का

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