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उत्तर प्रदेश

बिलारी में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज़ 30 से 50 लोग पहुंच रहे अस्पताल, दिसंबर में 900 से अधिक मामले दर्ज

बिलारी में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज़ 30 से 50 लोग पहुंच रहे अस्पताल, दिसंबर में 900 से अधिक मामले दर्ज
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बिलारी। क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने आमजन की चिंता बढ़ा दी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलारी से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन 30 से 50 लोग कुत्ते व अन्य जानवरों के काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें नए और पुराने दोनों प्रकार के मरीज शामिल हैं।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजपाल ने बताया कि बीते माह दिसंबर में स्थिति और भी गंभीर रही। दिसंबर महीने में कुल लगभग 919 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुत्तों के साथ-साथ बंदर और बिल्ली के काटने के केस भी शामिल हैं। लगातार बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।

उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई, जबकि कुछ गंभीर मामलों में कैटेगरी-3 के अंतर्गत एआरएस वैक्सीनेशन कराना पड़ा। डॉ. राजपाल के अनुसार, चेहरे, सिर या गर्दन के ऊपर किसी भी गर्म खून वाले जानवर द्वारा काटे जाने के मामलों को अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक माना जाता है।

चिकित्सा अधीक्षक ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित गलत परंपराओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग कुत्ते के काटने पर जख्म पर मिर्च, मसाला, हल्दी या अन्य घरेलू नुस्खे लगा लेते हैं, जो पूरी तरह गलत और खतरनाक है। इससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानवर के काटने पर सबसे पहले जख्म को कम से कम 20 मिनट तक बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। किसी भी प्रकार की पट्टी, तेल या घरेलू नुस्खे न अपनाएं और तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी रेबीज वैक्सीन अवश्य लगवाएं।

डॉ. राजपाल ने बताया कि अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को समय पर इलाज मिल सके।

बिलारी और आसपास के इलाकों में कुत्तों के बढ़ते हमलों से दहशत का माहौल बना हुआ है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप ले सकती है।

वारिस पाशा बिलारी

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