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उत्तर प्रदेश

बिरादरी के बाहर शादी नहीं, 25 साल में हो लड़कियों का ब्याह… मेरठ में बैठी ‘जाट पार्लियामेंट’, ये 11 प्रस्ताव पास

बिरादरी के बाहर शादी नहीं, 25 साल में हो लड़कियों का ब्याह… मेरठ में बैठी ‘जाट पार्लियामेंट’, ये 11 प्रस्ताव पास
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मेरठ जिले के सरधना तहसील में आने वाले सकौती टांडा कस्बा में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद की ओर से निर्मित महाराजा सूरजमल की उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतिमा के अनावरण किया गया. इस समारोह के अवसर पर जाट समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित भी हुई. इस दौरान जाट सरदारी ने समाज के हित में 11 प्रमुख प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए.

बैठक में पहला प्रस्ताव युवाओं को जाट इतिहास से जोड़ने पर केंद्रित रहा. समाज के युवाओं को जाट महापुरुषों का इतिहास पढ़ने और उनकी जयंती व पुण्यतिथि मनाने के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया गया. दूसरे प्रस्ताव में युवाओं को तकनीकी और स्किल एजुकेशन के साथ-साथ उच्च शिक्षा हासिल करने और स्वरोजगार तथा व्यापार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया.

जाट सभा में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

तीसरे प्रस्ताव के तहत दीनबंधु, रहबरे आजम सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई गई. चौथे प्रस्ताव में जाट समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाकर युवाओं में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया. पांचवें प्रस्ताव में अंतरजातीय विवाह पर पूरी तरह विराम लगाने की बात कही गई, जबकि छठे प्रस्ताव में उच्च पदों पर आसीन जाट नेताओं और अधिकारियों से समाज के लोगों की निस्वार्थ मदद करने की अपील की गई.

जाट एकता को मजबूत करने का आह्वान

सातवें प्रस्ताव में क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर विश्व स्तर पर जाट एकता को मजबूत करने का आह्वान किया गया. आठवें प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उन राज्यों में जाटों को OBC आरक्षण दिलाने के लिए प्रयास तेज करने की बात कही गई, जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. नौवें प्रस्ताव में जाट महापुरुषों के इतिहास को सीबीएसई, एनसीईआरटी सहित राज्य और केंद्रीय पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग रखी गई.

शादी की उम्र बढ़ाने की सलाह

दसवें प्रस्ताव में लड़के और लड़कियों की शादियां 23 से 25 वर्ष की आयु के बीच करने की सलाह दी गई. वहीं, ग्यारहवें प्रस्ताव में 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारा बढ़ाने, जाट युवाओं को सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करने और किसी अन्य समाज पर आक्षेप या टिप्पणी न करने का संकल्प लिया गया.

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