प्रयागराज- महाकुंभ-2025 में जरूर करें इन माधव मंदिरों के दर्शन

स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी बताते हैं कि सृष्टि रचना को ब्रह्माजी ने यज्ञ के लिए त्रिकोणात्मक वेदी बनाई थी। उसे अंतर्वेदी, मध्य वेदी, बर्हिवेदी के रूप में जाना जाता है। बहिर्वेदी में झूंसी, अंतर्वेदी में अरैल व मध्यवेदी दारागंज का क्षेत्र है। हर क्षेत्र में चार-चार माधव स्थित हैं। मत्स्य पुराण में लिखा है कि द्वादश माधव परिक्रमा करने वाले को सारे तीर्थों व देवी-देवताओं के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।
कहां स्थित कौन से माधव
अंतर्वेदी के माधव
वेणीमाधव : दारागंज स्थित वेणी (त्रिवेणी) तट पर वेणी माधव विद्यमान हैं। यह प्रयाग के नगर देवता हैं।
अक्षयवट माधव : यह गंगा-यमुना के मध्य में विराजमान हैं।
अनंत माधव : दारागंज में अनंत माधव का प्राचीन मंदिर है।
असि माधव : शहर के ईशान कोण में स्थित नागवासुकी मंदिर के पास असि माधव वास करते हैं।
मनोहर माधव : जानसेनगंज में मनोहर माधव है। द्रव्येश्वरनाथ मंदिर में लक्ष्मीयुक्त मनोहर माधव हैं।
बिंदु माधव : शहर के वायव्य कोण में द्रौपदी घाट के पास बिंदु माधव निवास है।
मध्यवेदी के माधव
श्रीआदि माधव : संगम के मध्य जल रूप में आदिमाधव विराजमान हैं।
चक्र माधव : प्रयाग के अग्नि कोण में अरैल में सोमेश्वर मंदिर के निकट स्थित हैं चक्र माधव।
श्रीगदा माधव : यमुना पार के क्षेत्र स्थित छिवकी रेलवे स्टेशन के पास गदा माधव का प्राचीन मंदिर है।
पद्म माधव : यमुनापार के घूरपुर से आगे भीटा मार्ग पर वीकर देवरिया ग्राम में स्थित हैं पद्म माधव।
बहिर्वेदी के माधव
संकटहर माधव : झूंसी में गंगा तट पर वटवृक्ष में संकटहर माधव का वास है।
शंख माधव : झूंसी के छतनाग में मुंशी के बगीचे में शंख माधव की स्थली मानी जाती है।




