कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के बड़े फैसले : परिवार, उद्योग, रोजगार और शिक्षा से जुड़े 13 अहम प्रस्तावों को मंजूरी

रिपोर्ट : विजय तिवारी
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में जनहित और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष कुल 14 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें से 13 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। ये निर्णय राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों, निवेशकों और युवाओं के लिए राहत और अवसर लेकर आए हैं।
परिवार में संपत्ति दान अब होगा सरल और सस्ता
राज्य सरकार ने पारिवारिक संबंधों के भीतर संपत्ति हस्तांतरण को आसान बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने स्पष्ट किया कि अब ब्लड रिलेशन में आने वाले परिवार के सदस्यों को संपत्ति दान करने पर भारी स्टाम्प शुल्क नहीं देना होगा।
अब ऐसे मामलों में केवल ₹5000 का नाममात्र स्टाम्प शुल्क लागू होगा।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से—
पारिवारिक संपत्ति विवादों में कमी आएगी
अवैध या अनौपचारिक लेन-देन पर रोक लगेगी
संपत्ति पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा
नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया अपनाने में सहूलियत होगी
कुशीनगर और झांसी में नए स्टाम्प कार्यालयों को मंजूरी
प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के तहत कैबिनेट ने कुशीनगर और झांसी में नए स्टाम्प कार्यालयों के निर्माण को स्वीकृति दी है।
इन कार्यालयों के शुरू होने से—
जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीकरण में तेजी आएगी
लोगों को जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
राजस्व संग्रह प्रणाली अधिक प्रभावी होगी
ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर नीति से औद्योगिक निवेश को रफ्तार
राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर (GCC) नीति की SOP को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी ने बताया कि इस नीति के तहत वित्त वर्ष के दौरान करीब 21 औद्योगिक कंपनियों का निर्माण या संचालन शुरू होगा।
इससे—
10,000 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
आईटी, सर्विस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा
उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी
फर्जी मार्कशीट प्रकरण : JS विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त
शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने सख्त कदम उठाया है।
कानून मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जानकारी दी कि JS विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद की मान्यता फर्जी मार्कशीट मामले की विस्तृत जांच के बाद समाप्त कर दी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि—
विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी
छात्रों की डिग्री और प्रमाणपत्रों का सत्यापन एवं शैक्षणिक संचालन आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा
दोषियों के खिलाफ आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी
सुशासन और विकास की दिशा में सरकार का फोकस
कैबिनेट के इन फैसलों को सरकार की सुशासन, पारदर्शिता, निवेश प्रोत्साहन और शिक्षा सुधार की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
एक ओर जहां परिवारों को आर्थिक राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को बढ़ावा, युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
सरकार का दावा है कि ये निर्णय प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाले साबित होंगे।




