काशी में "मसान की होली" के विरोध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन

उत्तर प्रदेश के काशी में होली का त्योहार रंगभरी एकादशी से ही शुरू हो जाता है. आग से धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की यह दुर्लभ होली काशी की प्राचीन पहचान है. लेकिन इस अनोखी होली पर अब विवाद खड़ा हो गया है. काशी विद्वत परिषद ने इस “मसान की होली” पर सवाल उठाया है. विद्वत परिषद के महामंत्री रामनारायण द्विवेदी ने कहा है कि काशी के श्मशान में होली खेलने की कोई परंपरा नहीं है. गौरतलब है कि मसान होली वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मनाई जाती है, जो यहां का प्रसिद्ध श्मशान घाट है. इस दौरान लाखों लोगों की भीड़ सुबह से ही यहां इकट्ठा होने लगती है. इस दौरान चिता-भस्म से होली खेली जाती है.
अजय शर्मा प्रदेश अध्यक्ष केंद्रीय ब्राह्मण सभा ने "मसान की होली" के विरोध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है
काशी में मसान वह तीर्थ स्थान हौ जहां महादेव जी स्वयं तारक मंत्र का उपदेश करेलन आउर मोक्ष प्रदान करेलन। नाचे गावे होरी खेले का जगह नहीं हौ।
बाई जी लोग नाच गा के आपन मुक्ति बनने बदे आवेलिन मगर चिता भस्म से होली नहीं खेलत रहलिन। महादेव जी त रोज अपने भूत परेतन के संघे भस्म से होली खेलत हउअन न तू देखत हउए ना हम देखत हई । मगर हमन ना महादेव जी हई ना भूत प्रेत हई। अईसे में हमन के ए सबसे दूर रहे के चांहि ।
तू सोच अगर भगवान ना करे तोहर कोई प्रियजन समाप्त हो जाए आउर तू ओनकर अंतिम संस्कार करें घाटे पर जा। अंतिम संस्कार करें के बाद जब तू राखी और फूल चुने लगा तब वहां ई लोग ओके लाते लाते रौदें लगे आउर हवा में उड़ावे लगे त तोहें कइसन लगी ?
तू सोच अगर भगवान ना करे तोहर कोई प्रियजन समाप्त हो जाए आउर तू ओनकर अंतिम संस्कार करें घाटे पर जा। अंतिम संस्कार करें के बाद जब तू राखी और फूल चुने लगा तब वहां ई लोग ओके लाते लाते रौदें लगे आउर हवा में उड़ावे लगे त तोहें कइसन लगी ?
श्मशान भूमि पर बाबा के गण अर्थात अघोरी,नागा संन्यासी इत्यादि क अधिकार हव। श्मशान के अधिष्ठात देवता के साथ भभूत की होली खेलने का परन्तु गृहस्थ एवं अन्य व्यक्ति क त प्रवेश भी वर्जित हव।




